पूरी दुनिया में कई फ्लाइट्स देरी से उड़ान भरने वाली हैं, जबकि कुछ को रद्द भी किया जा सकता है। असल में, यूरोपियन एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी एअरबस ने शुक्रवार को बताया कि उसके A320 परिवार के कई एयरक्राफ्ट में तत्काल सॉफ्टवेयर बदलाव करने होंगे। कुछ मामलों में हार्डवेयर भी बदलना पड़ेगा। इसी वजह से हजारों उड़ानों पर असर पड़ने की संभावना है। भारत में भी करीब 300 फ्लाइट्स देरी से उड़ान भर सकती हैं।

कुछ दिन पहले एअरबस को पता चला कि सोलर रेडिएशन उसके डेटा को प्रभावित कर सकता है, जिससे फ्लाइट कंट्रोल में दिक्कत आ सकती है। यहां समझने वाली बात यह है कि इंडिगो और एअर इंडिया, भारत के दो बड़े ऑपरेटर हैं, जो A320 एयरक्राफ्ट का व्यापक तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

कितने विमान हुए हैं प्रभावित?

अभी के लिए दोनों एयरलाइंस ने एअरबस की इस नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। इंडिगो के पास वर्तमान में A320 परिवार के 370 विमान हैं, जबकि एअर इंडिया के बेड़े में 127 विमान इस श्रेणी के हैं। एअर इंडिया एक्सप्रेस के पास भी लगभग 40 ऐसे विमान मौजूद हैं।

अब यह बताया जा रहा है कि ज्यादातर विमानों में केवल सॉफ्टवेयर अपडेट की आवश्यकता होगी। इसी वजह से उन्हें अस्थायी तौर पर ग्राउंड करना पड़ेगा। भारत के लिए राहत की बात यह है कि दो से तीन दिनों में सॉफ्टवेयर अपडेट पूरा किए जाने की संभावना है, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो जानी चाहिए।

एअरबस का बयान

इस समस्या को लेकर एअरबस ने अपने बयान में कहा है कि A320 परिवार के एयरक्राफ्ट के अध्ययन में पता चला कि इंटेंस सोलर रेडिएशन की वजह से आवश्यक डेटा प्रभावित हो सकता है, जो फ्लाइट कंट्रोल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एअरबस ने ऐसे कई एयरक्राफ्ट की पहचान की है, जिन पर इसका असर पड़ सकता है। इसी कारण उसने एविएशन अथॉरिटीज़ के साथ मिलकर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाए हैं।

इंडिगो की प्रतिक्रिया

इंडिगो ने कहा, “हम एअरबस द्वारा जारी नोटिफिकेशन से अवगत हैं। हम एअरबस के साथ बेहद नज़दीकी से काम कर रहे हैं और सभी निर्देशों का पालन कर रहे हैं। आवश्यक निरीक्षण किए जा रहे हैं और हमारा प्रयास है कि संचालन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।”

एअर इंडिया की प्रतिक्रिया

वहीं, टाटा समूह की एअरलाइन एअर इंडिया ने कहा है, “हमारे कुछ विमानों में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का रियल-एलाइन्मेंट किया जाएगा। इसी वजह से कुछ उड़ानें देरी से संचालित हो सकती हैं।”