अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नई व्यवस्था लागू की, जिसके तहत यह अफगानी नागरिकों को नागरिकों को चार असमान वर्गों में विभाजित करती है, दासों को एक कानूनी चोला पहनकर स्पष्ट रूप से गुलामी को वैध करती है। साथ ही यह व्यवस्था अफगानी मुल्लाओं या मौलवियों को अपराधों के लिए मुकदमों से भी छूट प्रदान करती है।

इस नई तालिबानी संहिता से मानवाधिकार संगठनों, पुराने शासन के अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के बीच आक्रोश पैदा हो गया है।

चार कैटेगरी में बांटा गया

तालिबान की नई संहिता के आर्टिकल 9 के मुताबिक, अफगान समाज को चार कैटेगरी में बांटा गया है, इसमें सबसे ऊपर मुस्लिम धार्मिक गुरुओं को रखा गया है। रावदारी मानवाधिकारी संगठन के मुताबिक, यदि मौलवी कोई अपराध भी करता है, तो उसे केवल सलाह देकर छोड़ दिया जाएगा। वहीं, उनसे नीचे के धार्मिक विद्वानों को शारीरिक दंड और जेल दोनों की सजा हो सकती है।

वर्गों के हिसाब से मिलेगी सजा

लंदन स्थित अफगानी न्यूज आउटलेट अफगान इंटरनेशनल के मुताबिक, तालिबान के नए अफगानिस्तान में एक ही अपराध के लिए सजा अपराधी के वर्गों के हिसाब से तय की जाएगी। सबसे हैरत की बात तो यह है कि तालिबान संहिता केवल कुछ खास तरह की शारीरिक हिंसा पर रोक लगाती है, जिसमें हड्डियां का टूटना, स्किन फटना शामिल हैं।

आगे कहा गया कि नए संहिता के मुताबिक, “एक पिता अपने 10 वर्षीय बेटे को नमाज न पढ़ने जैसी बातों को गलती बताकर सजा दे सकता है।”

देवबंदी इस्लामी जाति व्यवस्था

एक ब्लॉग में इसे तालिबान शासन की अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात में शुरू की गई देवबंदी इस्लामी चतुर्वर्ण जाति व्यवस्था कहा जा रहा है।

नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (एनआरएफ) की मीडिया सेल ने कहा कि तालिबानी शासन ने गुलाम व्यवस्था को कानूनी बना दिया है, यहां कोर्ट अपना फैसला आरोपी के सोशल स्टेट्स को देखकर सुनाएगी। एक्स पर एंटी तालिबान निकाय के अहमद मसूद ने कहा, “उच्च वर्ग के लोग अब सुरक्षित रहेंगे और गरीबों को सजा मिलेगी।”

2021 से राज कर रहा तालिबान

बता दें कि साल 2021 में अमेरिका के वापस जाने के बाद अफगानिस्तान में तालिबानी शासन लौट आया है। तभी से तालिबान यहां अपने कायदे कानून से लोगों के जोर जबरदस्ती कर शासन चला रहा है। अब यहां सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने अपने हिसाब से नए फरमानों को जारी है। जो जल्द अमल में लाया जा रहा है।

जानकारी दे दें कि अफगानिस्तान में यह नया कानून पूर्वी प्रांत के खोस्त में एक व्यक्ति को 13 साल के लड़के से फांसी दिलवाने के एक माह बाद आया है। व्यक्ति पर अपने परिवार के 13 सदस्यों की हत्या का दोषी माना गया था। इस फांसी को करीब 80 हजार लोगों ने देखा गया। वहीं यह आदेश अफगान की सर्वोच्च अदालत ने दिया था, जिसे तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा ने मंजूरी दी थी। आगे पढ़िए अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भीषण धमाका, कई लोगों की मौत