आज विश्व जनसंख्या दिवस है। चीन और भारत जैसे देशों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों के साथ सबसे कम या सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों से जुड़ी कई खबरें अब तक आप पढ़ चुके होंगे। लेकिन बहुत कम ही लोगों ने महिलाओं और उनके स्वास्थ्य के कोण से इस मुद्दे पर विचार किया है। गर्भ निरोधकों के आविष्कार से पहले महिलाओं का दर्जन-आधा दर्जन बच्चों का जन्म देना कोई बड़ी बात नहीं थी। कुछ महिलाओं के तो 50 से ज्यादा बच्चे भी रहे हैं। आखिरकार एक महिला के लिए कितने बच्चों को जन्म देना स्वास्थ्य के लिए लिहाज से आदर्श है?
प्राकृतिक तौर पर लड़कियों की माहवारी 12-13 साल की उम्र में शुरू हो जाती है और करीब 50-51 साल की उम्र तक जारी रहती है। प्राकृतिक तौर पर माहवारी शुरू होने के बाद लड़कियों को प्रजनन और गर्भधारण के योग्य मान लिया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य कारणों से हर देश में लड़कियों के विवाह या मां बनने की न्यूनतम उम्र तय की गई है। अगर कानूनी सीमाओं को थोड़ी देर के लिए भूल भी जाएं तो एक महिला अपने जीवन के करीब 37-38 साल मां बनने के काबिल होती है। गर्भधारण और प्रसव के बीच औसतन नौ महीने लगते हैं। अगल एक महिला के औसत प्रसव योग्य समय 38 साल मान लिया जाए तो इस दौरान वो करीब 40 बार मां बन सकती है। लेकिन ये कागजी गुणागणित जमीनी हकीकत से दूर है। जाहिर है कि एक महिला एक बच्चे को जन्म देकर तुरंत दूसरे बच्चे को जन्म देती रही है तो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए ये खतरनाक होगा।
विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं के जीवन को ज्यादा जोखिम होता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मानें तो पांच बार से ज्यादा मां बनने वाली महिलाओं के गर्भाशय का हैमरेज होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है। ज्यादा बच्चा पैदा करने से महिला के अन्य आंतरिंग अंगों को भी गंभीर क्षति पहुंचती है जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
तो ऐसे में सवाल ये है कि आखिर एक महिला स्वस्थ और सुरक्षित तरीके से कितने बच्चे पैदा कर सकती है? यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के अनुसार तीसरे बच्चे के बाद महिलाओं में धमनियों को मोटे होने और रक्तचाप तेज होने की आशंका 50 फीसदी बढ़ जाती है। यानी तीन से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर महिलाओं के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार महिलाओं के मृत्य के दो बड़े कारण हैं गर्भधारण और प्रसव। भारत जैसे विकासशील देशों और पिछड़े देशों में ये समस्या और भी विकराल है। एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक भारत की जनसंख्या 170 करोड़ हो जाएगी और वो आबादी के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। ऐसे में न केवल महिलाओं बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि हम गर्भधारण और प्रसव से जुड़ी विशेषज्ञों की राय का सम्मान करें।
