हर फल आपके लिए लाभदायक होता है, लेकिन पपीते के साथ खास बात ये है कि हरा पपीते भी आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। हरे पपीते से भी हमारी सेहत को काफी फायदे होते हैं। आइए जानते हैं हरा पपीता किस तरह आपकी सेहत के लिए लाभदायक होता है।
कोलेस्ट्रोल कम करता है- पपीते में उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होता है और ये विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होता है। अपने इन्हीं गुणों के चलते ये कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी असरदार है। पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्के नहीं बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप समेत कई अन्य ह्रदय रोगों का कारण बन सकते हैं।
वजन कम करता है- जिन लोगों का लक्ष्य अपना वजन कम करना है उन्हें अपने आहार में पपीते को जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। पपीते में मौजूद फायबर एक और जहां आपको तारो-ताजा महसूस करवाता है वहीं आपकी आंत की मूवमेंट को ठीक रखता है जिसके फलस्वरूप वजन घटाना आसान हो जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है- पपीता आपके शरीर के लिए आवश्यक विटामिन सी की मांग को पूरा करता है। ऐसे में अगर आप हर रोज कुछ मात्रा में पपीता खाते हैं तो आपके बीमार होने की आशंका कम हो जाएगी। आपका प्रतिरोधक तंत्र आपको बीमार कर देने वाले कई संक्रमणों के विरुद्ध ढाल का काम करता है। केवल एक पपीते में इतना विटामिन सी होता है जो आपके प्रतिदिन की विटामिन सी की आवश्यकता का 200 प्रतिशत होता है।
तनाव कम करता है- पूरे दिन टूटकर काम करने के बाद घर लौटने पर अगर एक प्लेट पपीते खा लिए जाएं तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इस कमाल के फल में आपको तनाव से दूर रखने की ताकत है। यूनिवर्सिटी ऑफ अलाबामा के एक अध्ययन के मुताबिक 200 mg विटामिन सी स्ट्रेस हारमोन को संचालित करने में सक्षम होता है। पपीते में यह प्रचुरता में उपलब्ध होता है।
गठिया रोगों से बचाता है- गठिया वास्तव में एक ऐसी बीमारी है जो शरीर को बेहद दुर्बल तो करती ही है जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित भी करती है। पपीते खाना आपकी हड्डियों के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है, इनमें विटामिन-सी के साथ-साथ सूजन-रोधी गुण होते हैं जो गठिया के कई रूपों से शरीर को दूर रखता है। एक अध्ययन के अनुसार विटामिन-सी युक्त भोजन न लेने वाले लोगों में गठिया का खतरा विटामिन-सी का सेवन करने वालों के मुकाबले तीन गुना होता है।
