पिछले तीन महीने से अस्पताल में भर्ती तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को रविवार(4 दिसंबर) शाम को कार्डिएक अरेस्ट पड़ा। ये खबर मिलते ही उनके हजारों समर्थक चेन्नई स्थित अपोलो अस्पातल के बाहर इकट्ठा हो गए। राज्य के राज्यपाल सी विद्यासागर राव अपना मुंबई दौरा तत्काल रद्द करके सूबे में वापस आ गए। रविवार रात से ही 68 वर्षीय जयललिता की सेहत को लेकर आशंका बनी रही। हालांकि सोमवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सूचित किया कि तमिलनाडु की सीएम अब खतरे से बाहर हैं। जयललिता की तबीयत अचानक खराब होने के साथ ही कई जगहों पर ऐसी खबरें चलीं कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। वहीं कुछ जगहों कार्डियाक अटैक की बात कही गई। हार्ट अटैक (हृदयाघात) और कार्डियाक अरेस्ट (हृदयगति रुकना) दोनों अलग-अलग चीजें हैं। आइए हम आपको बताते हैं दोनों के बीच अंतर।
हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इनफ्रैक्शन तब होता है जब शरीर की कोरोनरी आर्टरी (धमनी) में अचानक गतिरोध पैदा हो जाता है। इस आर्टरी से ही हमारे हमारे हृदय की पेशियों तक खून पहुंचता है। जब हृदय की पेशियों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है तो वो निष्क्रिय होने लगती हैं। यानी हार्ट अटैक में दिल के अंदर की कुछ पेशियां काम करना बंद कर देती हैं। धमनियों में आए ब्लॉक को दूर करने के लिए कई कई तरह के इलाज किए जाते हैं। अगर स्थिति गंभीर है तो उसके अनुसार एंजियोप्लास्टी, स्टेनिंग और सर्जरी के माध्यम से मरीज की आर्टरी के गतिरोध को दूर किया जाता है जिससे उसके दिल तक दोबारा खून पहुंच सके।
कार्डिएक अरेस्ट में दिल के अंदर वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन पैदा होने की वजह से होता है। सरल भाषा में कहे तो दिल के अंदर विभिन्न अवयवों के बीच सूचना का आदान-प्रदान गड़बड़ा जाता है जिसकी वजह से दिल की धड़कन पर बुरा असर पड़ता है। स्थिति पूरी तरह बिगड़ने पर दिल की धड़कन रुक जाती है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। कार्डिएक अरेस्ट के इलाज के लिए मरीज को कार्डियोपलमोनरी रेसस्टिसेशन (सीपीआर) दिया जाता है जिससे उसकी उसकी हृदय गति को नियमित किया जा सके। मरीज को “डिफाइब्रिलेटर” से मरीज को बिजली का झटका दिया जाता है जिससे दिल की धड़कन को नियमित होने में मदद मिलती है।
जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी हो उन्हें कार्डिएक अरेस्ट होने की ज्यादा आशंका रहती है। अगर किसी व्यक्ति को पहले हार्ट अटैक या हार्ट फेल्योर हुआ उनमें कार्डिएक अरेस्ट की आशंका बहुत बढ़ जाती है। अगर आपके माता-पिता या दादा-दादी, नाना-नानी को दिल की बीमारियों का इतिहास रहा है तो भी आपको सावधान रहना चाहिए। खून की नलियों को गतिरोध वसा (कोलेस्ट्राल) के जमा होने से होता है। इसलिए आपके माता या पिक्षा पक्ष में इस बीमारी से पीड़ित रहने के इतिहास है तो आपको इसके प्रति सचेत रहना चाहिए।
