हाल के दिनों में आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं। इंटरनेशनल डिजाइनर केट स्पेड, आध्यात्मिक गुरू भय्यूजी महराज, बुराड़ी में सामूहिक आत्महत्या इत्यादि। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल तकरीबन 8 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। दुनिया भर में आत्महत्या के शिकार ज्यादातर 15 से 29 साल की एज के बीच पाए गए हैं। इससे पता चलता है कि युवाओं में हताशा दुनिया भर में किस स्तर पर है। हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि विवाहित महिलाओं के मुकाबले विवाहित पुरुष ज्यादा आत्महत्या करते हैं। इसके अलावा एक अन्य शोध में यह बताया गया है कि पुरुष महिलाओं के मुकाबले आत्महत्या के लिए ज्यादा घातक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
शोध में बताया गया है कि ज्यादातर पुरुष आत्महत्या के लिए ऊंची जगहों से छलांग लगाने, फांसी लगा लेने या फिर ऐसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं जिनमें बचने के चांसेज बेहद कम होते हैं। जबकि महिलाएं ज्यादातर आत्महत्या के लिए जहर खाने, नसें काट लेने जैसे तरीके आजमाती हैं।
महिलाओं से ज्यादा पुरुष आत्महत्या क्यों करते हैं ?
आत्महत्या दरअसल एक मानसिक बीमारी के बाद का कदम है। मानसिक रूप से अवसादग्रस्त होने के बाद ही कोई ऐसे कदम उठाता है। पुरुषों अपने मानसिक अस्वस्थता को लेकर बेहद संकोची होते हैं। ऐसे में वह इसके इलाज को लेकर काफी हिचकते हैं। इसके फलस्वरूप, समस्या बढ़ती है और वह आत्महत्या के काफी करीब आते रहते हैं। वहीं महिलाओं में ऐसा नहीं है। वह इसे ईगो का सवाल नहीं बनाती। वे अपने अवसाद पर डिस्कशन करती हैं और इसके इलाज के लिए भी तैयार रहती हैं। यही वजह है कि पुरुषों के सुसाइड संबंधी आंकड़े महिलाओं से ज्यादा होते हैं।
क्या होते हैं आत्महत्या के लक्षण – किसी को भी आत्महत्या से बचाने में उनके परिवार के लोग, दोस्त और सहकर्मी मदद कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले किसी भी ऐसे मानसिक रोगी व्यक्ति के लक्षणों को नोटिस करना चाहिए। व्यक्ति में अवसाद के ये पांच लक्षण अगर लगातार बने रहें तो वह आत्महत्या के लिए प्रेरित होता है। इसमें मन का उदास होना, काम में मन नहीं लगना, भूख नहीं लगना, नींद नहीं आना, एकाग्रता में कमी और मरने की भावना शामिल हैं। ऐसे लोगों पर परिवार के लोगों को नजर रखना चाहिए। ताकि समय रहते पीड़ित व्यक्ति को आत्महत्या करने से रोका जा सके।
