ल्यूकेमिया, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का एक प्रकार है। इस बीमारी में शरीर में ब्लड के बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। जिसकी वजह से रोगी के शरीर में खून कमी और कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। ल्यूकेमिया की बीमारी बच्चों को ज्यादातर प्रभावित करती है। शि अगर समय पर निदान कर ल्यूकेमिया का इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाए तो इसके ठीक होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। वहीं एक्यूट ल्यूकीमिया युवाओं को अधिक प्रभावित करती है। अगर इस बीमारी की पहचान और रोकथाम समय पर नहीं हो पाती तो जान भी जा सकती है। इसलिए ल्यूकेमिया की पहचान करने के लिए इसके लक्षणों की जानकारी होना बेहद जरूरी होता है। आइए जानते हैं ल्यूकेमिया के पांच लक्षण।
ल्यूकेमिया के प्रकार: ल्यूकेमिया बीमारी के दो प्रकार होते हैं। एक तीव्र ल्यूकेमिया ( Acute Leukemia) और दूसरा दीर्घ ल्यूकेमिया (Chronic Leukemia )। तीव्र ल्यूकेमिया छोटे बच्चों को अधिक होता है और दीर्घ ल्यूकेमिया प्रोढ़ व्यक्तियों में अधिक देखने को मिलता है।
लक्षण
त्वचा का पीला पड़ना: आमतौर पर ल्यूकेमिया की बीमारी में त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है।
अधिक थकान: वैसे तो थकान होना आमबात है लेकिन हर समय थकान महसूस करना खतरनाक हो सकता है। ल्यूकेमिया की बीमारी का एक लक्षण थकान महसूस करना भी होता है।
बुखार: ल्यूकेमिया की बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। इम्यून सिस्टम के कमजोर पड़ने पर फ्लू, बुखार और जल्दी-जल्दी कोल्ड होना भी इस बीमारी का एक लक्षण है। इसलिए इन इन्फेंकशन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जल्दी-ज्लदी सांस लेना: आमतौर पर तेज दौड़ने या भारी काम करने से सांस जल्दी-जल्दी ली जाती है। लेकिन ल्यूकेमिया में यह प्रक्रिया बढ़ जाती है। सांसें नॉर्मल से छोटी हो जाती हैं।
घाव भरने में देर लगना: इस बीमारी में घावों को भरने में जरूरत से ज्यादा समय लगता है। अगर आपको यह महसूस हो कि आपके घाव बहुत दिन से नहीं भरा तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित उपचार कराएं। क्योंकि लक्षण ल्यूकेमिया का लक्षण भी होता है।
