आंसू हर बार अच्छे भले न होते हों लेकिन आंखों में इनके निर्माण में बाधा पहुंचना आपकी आंखों के लिए सही नहीं है। जब आंखों में आंसू नहीं बनते हैं तो वे सूख जाती हैं। ऐसे में आपकी आंखों में जलन महसूस होना शुरू हो जाता है। आंखों के बाहरी सतह पर एक चिपचिपा म्यूकस बनता रहता है। जब आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बनते तब आंखों की चिकनाहट चली जाती है और आंखों में सूखापन आ जाता है। इसे ड्राइ आई सिंड्रम कहते हैं। आंखों की पलकों के आस-पास कई ग्रंथियां आंसू उत्पादित करती हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इनके उत्पादन में कमी आती जाती है। इसके अलावा पर्यावरणीय स्थिति या फिर कुछ दवाओं के साइड इपेक्ट्स की वजह से भी आंखों में आंसुओं का उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में आंखों में इर्रिटेशन, चुभन और जलन जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में कुछ घरेलू उपायों की मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
नारियल का तेल – यह तेल आंखों को नमी देनेवाले एजेंट की तरह काम करता है और आंसूओं को जल्दी सूखने से बचाता है। इसके अलावा इसमें ऐंटी-इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आंखों में हो रही चुभन को कम करने में सहायक होते हैं। कॉटन बॉल को नारियल तेल में डुबोएं और इसे आंखों पर 15 मिनट तक रखा रहने दें। इस प्रक्रिया को दिनभर में कई बार दोहराएं।
एलोवेरा – अपने एल्केलाइन गुणों की वजह से ऐलोवेरा ड्राइ आइज़ के लिए प्रभावी उपाय है। इसका मॉइस्चराइज़िंग और ऐंटी-इन्फ़्लेमेटरी गुण आंखों की सूजन और लालिमा को कम करता है। ऐलोवेरा के पत्ते को धोकर उसमें से जेल निकाल लें। टिशू पेपर पर थोड़ा जेल निकालकर इसे आइलिड्स पर लगाएं। 10 मिनट बाद आंखों को कुनकुने पानी से धोएं। दिन में दो बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।
गुलाबजल – यह आंखों को तनावमुक्त रखने और थकी हुई आंखों को आराम पहुंचाने में मदद करता है। ड्राइ आइज़ की एक बड़ी वजह है विटामिन ए की कमी और गुलाब जल में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होती है। कॉटन बॉल्स या कॉटन पैड्स को गुलाब जल में डुबोएं और इन्हें बंद आंखों पर लगाएं। 10 मिनट तक आंखों पर रखा रहने दें, फिर ठंडे पानी से आंखों को धो लें। यदि तुरंत आराम पाना चाहती हैं तो शुद्घ गुलाब जल को आइ ड्रॉप की तरह भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इस प्रक्रिया को दिन में तीन बार दोहराएं।

