रमजान के महीने में नेकियां कमाने के लिए हर कोई रोजा रखता है। इसमें सहरी और इफ्तार के बीच कुछ भी खाने-पीने की मनाही होती है। औसतन यह 15 घंटे का होता है। ऐसे में सेहतमंद लोगों के लिए यह बहुत मुश्किलों भरा नहीं होता। लेकिन दिल और डायबिटीज के रोगियों के लिए यह थोड़ा सा मुश्किल होता है। हालांकि, दिल और डायबिटीज के मरीजों के रोजा रखने में कोई दिक्कत नहीं है। बस उन्हें डॉक्टर से बराबर परामर्श लेकर ही ऐसा करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजे के दौरान दिल और मधुमेह के मरीजों को अपने ब्लड ग्लूकोज की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा जो लोग दवाएं खाते हैं उन्हें विशेषज्ञों की सलाह पर ही दवाओं का समय बदलना चाहिए।
दिल और मधुमेह के मरीजों को इस दौरान अपने खान-पान पर भी खास ध्यान देना चाहिए। उन्हें भारी भोजन से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा तले-भुने फूड्स जैसे- पकौड़े, मिठाइयां आदि से दूर रहना चाहिए। पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि रोजा के दौरान मधुमेह के मरीजों को सहरी और इफ्तार दोनों वक्त प्रोटीन एवं रेशेयुक्त भोजन ही करने चाहिए। इसके अलावा तीखे और मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए। बहुत ज्यादा चाय और कॉफी का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
दिल के मरीजों के लिए भी ऐसा ही निर्देश है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों का हृदय रोग नियंत्रण में है या स्थिर है, ऐसे लोग रोजा आराम से रख सकते हैं। उन्हें अपनी दवाइयां बराबर लेती रहनी है। सहरी और इफ्तार की वजह से दवाइयों के समय में बदलाव डॉक्टर की सलाह से ही करें। रमजान के महीने का धार्मिक महत्व होता है। इसके साथ ही यह सेहत के लिए बेहतर महीना होता है। रोजा रखने से शारीरिक स्वास्थ्य को काफी लाभ मिलता है।
