दिल्ली के दो मंत्री अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ भूख हड़ताल पर बैठे स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के चिकित्सकीय जांच में उनके वजन बढ़ने का मामला काफी चर्चा में है। खबर है कि जैन का वजन भूख हड़ताल के बाद 1.2 किलोग्राम बढ़ गया। डॉक्टर्स भी इस बात से हैरान हैं। ऐसे में एक सवाल जो सबके मन में है कि क्या भूख हड़ताल के दौरान वजन बढ़ सकता है? इसका जवाब जानने के लिए सबसे पहले हम हंगर स्ट्राइक के दौरान शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब कोई भूख हड़ताल करता है तब तीन दिन तक उसे तेज भूख लगती है। इस दौरान भी अगर वह कुछ नहीं खाता है तो तीन दिन बाद दिमाग इस बात को स्वीकार कर लेता है कि अब खाना नहीं मिलने वाला। ऐसे में पेट दर्द जैसे लक्षण दिखने बंद हो जाते हैं। इस दौरान शरीर भोजन की तलाश में बॉडी में संरक्षित फैट को खाना शुरू करता है। एक महीने बाद भी अगर कुछ खाने को न मिले शरीर अपना ही प्रोटीन कंज्यूम करना शुरू कर देता है। इसके बाद मसल्स और फिर अन्य अंगों का नंबर आता रहता है। कहने का मतलब है कि भूख हड़ताल में आप अपने आप को खाने लगते हैं। पहले दो हफ्ते तक तो स्ट्राइकर के हार्मोन्स में बदलावों के चलते बहुत तकलीफ नहीं होती लेकिन तीन हफ्ते बाद उन्हें चक्कर आने, जोड़ों के दर्द और सिर दर्द की समस्याएं आती हैं।

अनशन के 30 दिनों के बाद स्ट्राइकर्स अपने शरीर के वजन का लगभग 18-20 प्रतिशत हिस्सा गंवा चुके होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक 50 दिनों के भूख हड़ताल के बाद स्थिति गंभीर होनी शुरू हो जाती है। इस दौरान हड़ताली अपने वजन का तीस प्रतिशत हिस्सा खो चुका होता है। तेज चक्कर आने के लक्षण महसूस होते हैं। आंखों की पुतलियां अनियंत्रित हो जाती हैं और दिल की धड़कन बेहद धीमी हो जाती है। इसके अलावा पेशाब गाढ़ा भूरा हो जाता है और कई मामलों में बंद ही हो जाता है। यह किडनी खराब होने का संकेत है। ऐसे में स्ट्राइकर की जान जाने की भी संभावना होती है।

क्या भूख हड़ताल से वजन बढ़ सकता है – भूख हड़ताल से वजन बढ़ने की कोई वजह नहीं होती है। खूब पानी पीने से भी वजन बढ़ने की कोई संभावना नहीं होती। इस दौरान अगर चाय-बिस्किट लिया जाए तो वजन बढ़ सकता है। लेकिन 24 घंटे में 1.2 किलोग्राम वजन बढ़ना संभव नहीं है।