हमारे देश में ही नहीं पूरे देश में लोग चावल का सेवन करते हैं और इसे आसानी से पचने वाले और आवश्यक तत्वों से भरपूर सुरक्षित खाना माना जाता है। जिन लोगों को गेहूं से दिक्कत या केलिएक बीमारी होती है, उनके लिए चावल खाना बहुत जरुरी हो जाता है। लेकिन कई ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई है जो अधिक मात्रा में चावल खाने वालों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। यूएस फेडेरल हेल्थ डेटा के अनुसार जो लोग अधिक अर्सेनिक वाला चावल खाते हैं तो उनके लिए यह परेशानी का कारण बन सकती है। इसके अनुसार इससे एशिया और मैक्सिको के लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि भारत में पैदा हो रहे चावल में इसकी मात्रा अधिक है और कुछ साल पहले यूएसएफडीए ने भारत के बासमती चावल सहित कुछ अन्य खाद्य उत्पादों में अर्सेनिक तत्व पाए जाने के बारे में कहा था।
दरअसल चावल मिट्टी या पानी से अर्सेनिक तत्व ऑब्जर्व कर लेता है और अधिक पानी में पैदा होने की वजह से अर्सेनिक तत्व ज्यादा हो जाता है। अर्सेनिक पानी, हवा, मिट्टी में पाया जाता है। यूएसएफडीए ने भारत के 30 किस्म के बासमती चावल में अर्सेनिक की मात्रा पाई थी और बाद में करीब 1200 सेंपल में ऐसा ही पाया गया था। बता दें कि अर्सेनिक की अधिक मात्रा से शरीर में कई तरह की दिक्कत होना शुरू हो जाती है, जिसमें स्किन से जुड़ी हुई कई बीमारियां, लंग कैंसर शामिल है और इससे दिल की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं में कराए गए इस सर्वेक्षण में यह बात पता चली कि आधा कप पका हुए चावल खाना आर्सेनिक की अधिकतम स्वीकार सीमा (10 हिस्सा प्रति अरब) वाला एक लीटर पानी का सेवन करने के बराबर है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान आर्सेनिक के संपर्क में आना चिंताजनक है क्योंकि यह पदार्थ गर्भनाल को पार करने में सक्षम है और यह गर्भ में विकसित होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।
