पेशाब शरीर से बेकार तरल पदार्थों के बाहर निकलने की प्रक्रिया है। दरअसल हम जो कुछ भी खाते पीते हैं हमारे शरीर की ग्रंथियां इस खाने में पोषक तत्वों और जरूरी चीजों को शरीर में ही रख लेती है जबकि बेकारी की चीजों को मल-मूत्र के जरिये बाहर निकाल देती है। इस पूरी प्रक्रिया में गुर्दे का अहम रोल होता है। लेकिन अगर आप को पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है और आप इसे टाल देते हैं तो आपकी ये आदत खतरनाक हो सकती है। और इसका असर आपकी गुर्दों की सेहत पर पड़ सकता है। किडनी का काम पेशाब के जरिये शरीर से यूरिक एसिड जैसे तत्वों को बाहर निकालना है अगर आप यूरीन को शरीर से बाहर नहीं जाने दे रहे हैं तो गुर्दों पर दबाव बढ़ेगा साथ ही किडनी में फिल्डर की प्रक्रिया भी धीमी हो जाएगी। इसके अलावा शरीर में पड़े टॉक्सिक आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यदि आपका यूरिनरी सिस्टम यानी कि पेशाब तंत्र स्वस्थ है तो सामान्य रुप से 2 से 4 घंटे तक पेशाब रोकना खतरनाक नहीं होता है। एक युवा शख्स का मूत्राशय यानी कि 2 कप तक पेशाब रोक कर रख सकता है लेकिन इससे ज्यादा देर तक पेशाब रोकना बीमारी को न्योता देना है, क्योंकि इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) हो सकता है। हालांकि रिसर्च और डॉक्टरों ने पेशाब रोक कर रखने की कुछ निश्चित समयसीमा नहीं बताई है लेकिन अगर आप एनलार्ज्ड प्रोस्टेट, न्यूरोजेनिक मूत्राशय, किडनी डिस्ऑर्डर, जैसे हालात से जूझ रहे रहे है तो पेशाब को रोक कर रखने से किडनी से संबंधित बीमारियाों के होने की संभावना बढ़ जाती है।
इस संबंध में गर्भवती महिलाओं के लिए खास हिदायत है। प्रेगनेंट महिलाओं में पहले से ही यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने का खतरा रहता है, लेकिन अगर गर्भवती महिलाएं पेशाब रोकती है तो इससे UTI का खतरा और भी बढ़ जाता है। रिसर्च कहता है कि यूरोप में महिलाएं सामान्य रुप से 3 घंटे से लेकर 6 घंटे तक पेशाब रोककर रख सकती हैं, लेकिन भारत में स्थिति थोड़ी अलग है। डॉक्टरों के मुताबिक यहां महिलाएं 2 से 5 घंटे तक पेशाब रोककर रख सकती है।
