आयुर्वेद प्राकृतिक चीजों के उपयोग पर काफी जोर देता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि तांबे के बर्तन में पानी पीने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है। आज विज्ञान भी इस बात से सहमत है। तांबे के बर्तन की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जिनकी वजह से इनमें पानी पीने से कई तरह की बीमारियों में लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में रखे जल को ताम्रजल कहा जाता है। आयुर्वेद कहता है कि ताम्रजल को पीने से शरीर के कई रोग बिना दवा के ही ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा ताम्रजल शरीर से जहरीले तत्व बाहर निकालने में भी सहायक होता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक पानी रखा हुआ हो तभी यह लाभकारी होता है।

आज हम ताम्रजल से ठीक हो जाने वाले रोगों के बारे में बात करेंगे। तांबे के बर्तन में रखा पानी शरीर में कॉपर की कमी को पूरा करता है। इससे बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा होती है। इसके अलावा गठिया रोग में भी तांबे में रखा जल काफी लाभकारी है। तांबे का जल शरीर में यूरिक एसिड को कम करता है इससे गठिया रोग से काफी राहत मिलती है। एनीमिया यानी कि खून की कमी वाली बीमारी तीस की उम्र पार कर चुकीं महिलाओं की एक आम समस्या है। एनीमिया से ग्रस्त लोगों को ताम्रजल का नियमित सेवन करना चाहिए।

ताम्रजल में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह कैंसर जैसे रोगों से लड़ने में काफी मदद करते हैं। तांबे का जल कफ, पित्त और वात की समस्या को भी दूर करता है। पाचन संबंधी परेशानी को दूर करने का सबसे बेहतर उपाय है ताम्रजल का सेवन। कम से कम 8 घंटे तक तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल गैस और एसिडिटी जैसी बीमारियों से निजात पाने के लिए काफी फायदेमंद नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।