Chanakya Niti: अच्छी सेहत के लिए मनुष्य हर अच्छी चीज को अपनी जीवनशैली में लाना चाहता है। आचार्य चाणक्य ने अच्छी सेहत के लिए भोजन से संबंधित कुछ नीतियां बताई हैं। स्वास्थ्य के बारे में बताई गई चाणक्य की नीति हर आयु वर्ग के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। चाणक्य बताते हैं कि जब भोजन पच जाए तभी पानी पीना चाहिए, क्योंकि भोजन के बीच में पिया गया पानी शरीर में विष का काम करता है। स्वास्थ्य के संबंधित और भी कई नीतियां हैं जिसे अपनाकर जीवनभर रोग-मुक्त रह सकते हैं।
वारि अजीरण औषधी, जीरण में बलवान ।
भोजन के संग अमृत है, भोजनान्त विषपान ॥1॥
आचार्य चाणक्य इस दोहे के माध्यम से कहते हैं कि जब तक भोजन पच न जाय तब तक पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन के बीच में पिया गया पानी विष के समान होता है। वहीं भोजन के पचने के बाद पिया गया पानी अमृत के समान होता है।
गुरच औषधि सुखन में भोजन कहो प्रमान।
चक्षु इंद्रिय सब अंश में, शिर प्रधान भी जान॥ 2॥
चाणक्य सभी औषधियों में गुरच (गिलोय) को अधिक प्रधानता देते हैं। आचार्य चाणक्य बताते हैं कि सभी प्रकार के सुखों में भोजन सबसे बड़ा सुख है। शरीर की सभी इंद्रियों में आंख प्रमुख है और सभी अंगों में प्रधान मस्तिष्क है। इसलिए मनुष्य को भोजन में कोताही नहीं बरतनी चाहिए। साथ ही सभी इंद्रियों में आँखों का विशेष ख्याल रखना चाहिए और मस्तिष्क को तनाव मुक्त रखना चाहिए।
चूर्ण दश गुणो अन्न ते, ता दश गुण पय जान ।
पय से अठगुण मांस ते तेहि दशगुण घृत मान ॥3॥
इस दोहे के माध्यम से चाणक्य कहते हैं कि खड़े अन्न से दस गुना पौष्टिक पीसा हुआ अन्न होता है। पीसे हुए अन्न से दस गुना गुणकारी दूध होता है। दूध से दस गुना पुष्टिक वाला आहार मांस होता है। मांस से दस गुना अधिक गुणकारी घी होता है। इसलिए स्वस्थ शरीर के लिए मनुष्य को चाहिए कि इन चीजों का सेवन करें।
राग बढत है शाकते, पय से बढत शरीर ।
घृत खाये बीरज बढे, मांस मांस गम्भीर ॥4॥
इस दोहे के माध्यम से चाणक्य शाक, दूध, घी और मास के बारे में बताया है। चाणक्य कहते हैं कि शाक से रोग बढ़ता है। दूध का सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है। घी खाने से वीर्य बढ़ता है और मांस का भोजन करने से शरीर में मांस की वृद्धि होती है।
