पोषक खाना हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। शरीर पर खान पान का बहुत प्रभाव पड़ता है। आर्युवेद में फास्ट फूड खाने को स्वास्थ्य के लिए जहर बताया गया है। यू. के मेंटल हेल्थ फांउंडेशन के मुताबिक हमारे दिमाग को ठीक तरीके से काम करने के लिए ओमेगा 3 और ओमेगा 6 जैसे षोषक तत्वों की जरुरत होती है। अगर मस्तिष्क में ये तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं होते तो व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि व्यक्ति को कभी फास्ट फूड या तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए। इस तरह का खाना खाने से मस्तिष्क में असंतुलन देखने को मिलता है। इस तरह का खाना खाने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।
हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि स्कूलों में पढ़ने वाले 60 फीसदी से ज्यादा बच्चे फास्ट फूड पर निर्भर रहते हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार फास्ट फूड या तला-भुना खाता है तो ऐसे व्यक्ति को डिप्रेशन जैसी बीमारी हो जाती है। इस तरह का खाना खाने से हार्मोन्स जैसे- कोर्टिसोल और डोपामाइन में अंसतुलन होता है। अगर ये ज्यादा हो जाता है तो व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार होता है।
फास्ट फूड में कैलोरी और शुगर की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण ज्यादा शरीर का वजन बढ़ता है। जो शरीर के लिए हानिकारक होता है। अधिक मात्रा या लगातार फास्ट फूड या तला-भुना खाना खाने से व्यक्ति को हाइपरएक्टिविटी हो सकती है। इससे व्यक्ति के दिमाग का संतुलन बिगडता है जो इस मानसिक बीमारी को जन्म देता है।
डॉक्टरों का मानना है कि फास्ट फूड या तला-भुना खाने में रीफाइन कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। इसकों खाने से खून में शुगर की मात्रा कम हो जाती है, जिसके कारण व्यक्ति में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसे विकार देखने को मिलते हैं।
जो लोग फास्ट फूड या तला-भुना खाना ज्यादा मात्रा में खाते हैं उन्हें कम नींद या कई बार नींद नहीं आती है। पूरी नींद ना आना शरीर के लिए हानिकारक होती है। फास्ट फूड या तला-भुना खाना खाने से शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे दिल की बीमारी हो सकती है।
