पालक का इस्तेमाल कई प्रकार के व्यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है। अनेक प्रकार के व्यंजनों में पालक के इस्तेमाल का सबसे बड़ा कारण ये है कि इसमें कई प्रकार के गुण पाए जाते हैं। पालक से बने एक व्यंजन के तौर पर इसे उबले हुए, हल्के से आम नाइजीरियाई सूप और स्टॉज में पकाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसे सलाद, जूस और स्मूदी में भी मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। पालक के ऊपर रिसर्च करने वालों का मानना है कि यह एक सुपर फूड है। पालक में जिस पोषक तत्व की मौजूदगी होती है, उसे फाइटोन्यूट्रिएंट्स (पौधों से प्राप्त फाइटोकेमिकल्स) के रूप में जाना जाता है। आगे जानते हैं सुपर फूड के तौर पर इसके अन्य फायदे।

1. फ्लेवोनोइड्स: पालक में जिन पोषक तत्वों की मौजूदगी होती है उनमें से एक फ्लेवोनोइड्स है। साथ ही पालक में ग्लूकोरोनाइड और ग्लूकोपरानोक्साइड्स पोषक तत्वों की भी मौजूदगी होती है। इसके अलावा पालक में पाए जाने वाले फ्लेवोनोइड्स के एक अन्य ग्रुप को मिथाइलेनडाइ ऑक्सिफ़्लावोन के रूप में जाना जाता है। ये सभी फ्लेवोनोइड्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

2. कैरोटीनॉयड: पालक में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी फाइटोन्यूट्रिएंट्स की दूसरी श्रेणी को कैरोटेनॉयड्स के रूप में जाना जाता है। इन कैरोटेनॉइड्स में ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन मौजूद होते हैं। फ्लेवोनोइड्स की तरह, इन कैरोटेनॉइड्स में भी खास गुण गुण होते हैं।

3. ओमेगा 3 फैटी एसिड: पालक में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) सबसे मुख्य रूप से पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड है। इसके अलावा जो पालक में स्टीयरिडोनिक एसिड (एसडीए) और इकोसापेंटेनोइक एसिड (ईपीए) पाए जाते हैं। शरीर में सूजन को नियंत्रित करने वाले अधिकांश एंटी-इंफ्लेमेटरी मैसेजिंग मॉलिक्यूल ओमेगा 3 फैटी एसिड से प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा पालक में कई ऐसे गुण भी मौजूद हैं जो मोटापे को कम करने में सहायक होते हैं। पालक में क्लोरोफिल की मात्रा होती है जिसके कारण यह हरा दिखता है। क्लोरोप्लास्ट के रूप में जानी जाने वाली क्लोरोफिल पालक की कोशिकाओं की झिल्ली में मौजूद होते हैं। सूर्य के प्रकाश, पोषक तत्व और क्लोरोफिल मिलकर क्लोरोप्लास्ट में ऊर्जा बनाते हैं। ये भूख को नियंत्रित करने में लाभकारी होते हैं।

पालक पर रिसर्च करने वालों का मानना है कि यह औषधीय गुणों से भरपूर है। जिसे भोजन, सलाद, साइड डिश, स्मूदी और जूस के तौर पर सप्ताह में सप्ताह में 5-6 बार इस्तेमाल करना चाहिए।