वैसे तो साल भर मच्छरों का प्रकोप रहता है, लेकिन बरसात के मौसम में ये और भी अधिक बढ़ जाते हैं। बारिश शुरू होने के साथ ही हर भारतवासी मच्छरों के बचाव का उपाय भी करना शुरू कर देते हैं। मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया, पीलिया और जाइका आदि जानलेवा बीमारियों को फैलने में सहायक होते हैं। साथ ही मच्छरों को काटने से कुछ लोगों को एलर्जी भी होती है जिस कारण कई बार स्किन से रिलेटेड बीमारी भी उत्पन्न हो जाती है। अगर आप भी इस बरसात के मौसम में मच्छर के प्रकोप से बचना चाहते हैं तो ये आयुर्वेदिक उपाय आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैं। ये उपाय आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मिताली मधुस्मिता द्वारा सुझाए गए हैं। डॉ. मधुस्मिता, द आर्ट ऑफ लिविंग के श्री-श्री ततवा पंचकर्म के प्रमुख चिकित्सक हैं।
- सबसे पहले आपको यह ध्यान रखना है कि घर और आस-पास के क्षेत्रों में कचरे और पानी का ठहराव न रहे, क्योंकि मच्छर इन्हीं गंदे स्थानों पर पनपते हैं।
- तुलसी (पवित्र तुलसी) रस में मजबूत लार्विसाइडल गुण होते हैं। इसलिए जहां मच्छर पनपने का संभावित जगह है वहां तुलसी रस का छिड़काव करें।
- तुलसी, लैवेंडर, लेमनग्रास, मैरीगोल्ड और पुदीना जैसे पौधे मच्छर को भगाने में मददगार साबित होते हैं। इसलिए इन पौधों को घर के आसपास लगाना चाहिए।
- नीम के पत्ते भी मच्छर को भगाने में सहायक होते हैं। इसलिए आसपास के वातावरण में नीम के पेड़ लगाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, हल्दी की जड़ों को नीम के पत्तों के साथ मिलकर मच्छरों से छुटकारा पाया जा सकता है। साथ ही इसमें गुग्गुलु (Commiphora wightii) मिलाना इसके प्रभावों को और बढ़ता है।
- काली मिर्च की छड़ों को जलाने से भी मच्छरों से छुटकारा पा सकते हैं।
- बेंज़ोइन राल मच्छरों को भगाने में कारगर साबित होता है। को पीछे हटाती है, जबकि इसकी खुशबू एक सुखदायक वातावरण बनाती है।
- इनमें से किसी एक का उपयोग करना भी मच्छरों की रोकथाम के लिए आवश्यक है। कपूर, नीम का तेल, नीलगिरी का तेल, नींबू का तेल, चाय के पेड़ का तेल या लैवेंडर का तेल आदि।
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना मच्छर जनित बीमारियों से बचाव का एक अच्छा साधन है।
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मच्छरों के काटने पर स्किन पर लगाएं ये चीज
- नीम का तेल और नारियल का तेल बराबर मात्रा में मिलाएं। फिर इसमें चंदन का तेल, थोड़ी मात्र में हल्दी का पेस्ट, नीम की पत्तियों का पेस्ट, नीम का तेल और चाय के पेड़ का तेल समान मात्रा में मिलाकर स्किन पर लगाएं।
- सूजन, लालिमा और खुजली इत्यादि को दूर करने के लिए ये है उपयोगी
- नीम के पत्तों का पेस्ट शहद के साथ मिलाकर लगाएं, क्योंकि नीम एक बहुत अच्छा एंटीडोट है।
- तुलसी किसी भी तरह के परजीवी संक्रमण के इलाज में सहायक है। इसका पेस्ट लगाने से आराम मिलता है।
- चंदन और हल्दी को समान मात्रा में पानी में मिलाकर ठंडा करके लगाने से सूजन खत्म होता है।
- शुद्ध गाय का घी एंटीहिस्टामाइन का एक अच्छा स्रोत है। इसलिए किसी भी कीड़े-मकोड़े के काटने पर इसे जगाया जा सकता है।
- अपामार्ग (चफ-फूल) के पत्तों को गुड़ या काली मिर्च के साथ मिलाकर मच्छर के काटने पर लगाया जा सकता है।
- एलोवेरा का गूदा एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है और इसमें सुखदायक प्रभाव होते हैं। इसलिए इसे मच्छर के काटने पर लगाया जा सकता है।
- दशांग लेप एक प्रभावी पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधी है। जिसे त्वचा पर लगाया जा सकता है। यह टैबलेट के रूप में भी उपलब्ध है और किसी भी कीड़े के काटने के प्रभावों को कम करने के लिए इसका सेवन भी किया जा सकता है।
- मच्छरों सहित किसी भी कीड़े के काटने से होने वाली सूजन को कम करने के लिए एप्सम सॉल्ट बाथ (एप्सम सॉल्ट के 3 टीस्पून गर्म पानी में मिलाया गया) बहुत प्रभावी है।
- नारियल पानी एंटीहिस्टामाइन और प्राकृतिक स्टेरॉयड का एक अच्छा स्रोत है। आधा कप नारियल पानी के साथ-साथ कामदुध रस (एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूला) की 1 गोली दिन में दो बार लेने से शरीर पर काफी प्रभाव पड़ेगा, और त्वचा पर मच्छरों के काटने के प्रभाव को कम करेगा।
- मच्छर जनित बीमारियों के प्रभाव को कम करने में गिलोय (एक उपयोगी जड़ी बूटी) का सेवन सहायक है।

