Mahabharat 5th May Episode online Updates: भीष्म पितामह अपने शिविर में होते हैं। इतने में उनके पास युधिष्ठर और अर्जुन आते हैं। उन्हें प्रणाम करते हैं। भीष्म पितामह युधिष्ठर को विजयभव का आशीर्वाद देते हैं। युधिष्ठर कहते हैं कि हम यहां विजयभव का आशीर्वाद लेने नहीं आए हैं। हमें कोई आशीर्वाद न दीजिए पितामह। भीष्म पितामह चौंक जाते हैं। युधिष्ठर कहते हैं कि हमारी विजय के बीच स्वयं आप खड़े हैं। भीष्म कहते हैं कि मैं दी हुई वस्तु वापस नहीं ले सकता। पुत्र तुम मेरी बात न काटो, मेरा बांण काटो, मेरा धनुष काटो। लेकिन आशीर्वाद मैं तुमसे वापस नहीं ले सकता। वासुदेव भली भांति जानते हैं कि अंत में जीत उन्हीं की होगी। वह सब जानते हैं। वह जानते हैं कि तुम्हें और तुम्हारी जीत के बीच से इस गंगा पुत्र को हटाने का उपाय क्या है। अगर मेरे सामने कोई नारी आ जाए तो मुझे इस रणभूमि से बाहर किया जा सकता है। ऐसे में युधिष्ठर पूछते हैं कि युद्ध के मैदान में नारी कैसे आ सकती हैं पितामह। भीष्म कहते हैं कि यह तुम वासुदेव से जाकर पूछो।

वहीं महाभारत के महासंग्राम में भगवान के एक बार फिर अर्जुन को समझाने के बाद वो अपने रथ पर जाकर बैठ जाते हैं। अर्जुन कहते हैं कि अगर आज सूर्य कुछ देर और ठहर जाए तो मैं पितामह का वध कर दूं। इस पर श्री कृष्ण उनसे कहते हैं कि तुम सिर्फ युद्ध करो और सूर्य की ओर न देखो। युद्ध का परिणाम मुझ पर छोड़ दो। जिसके बाद अर्जुन भीष्म पितामह पर फिर हमला करना शुरू कर देते हैं। अर्जुन अपने बाणों से कई बार भीष्म का धनुष तोड़ देते हैं और उन्हें घायल कर देते हैं। इसके बाद दुर्योधन पितामह भीष्म के शिविर में जाकर उन पर पक्षपात करने का आरोप लगाता है। वो पितामह से कहता है कि आप युद्ध तो मेरी तरफ से कर रहे हैं लेकिन आपके प्राण पांडवों में बसे हैं।

इससे पहले युद्ध में पितामह भीष्म अकेले ही पांडवों की सेना भारी पड़ते नजर आ रहे थे। जिसे देख कर अर्जुन भयभीत हो गए थे। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण से कहा पितामह के रहते हम इस युद्ध को कभी जीत नहीं पाएंगे। उनका वध आवश्यक है। इस पर भगवान ने अर्जुन का रथ पितामह की ओर मोड़ दिया। अर्जुन पितामह के इस विध्वंस को रोकने के लिए उनके समक्ष युद्ध के लिए पहुंचे थे।

इससे पहले, प्रथम दिन के युद्ध की समाप्ति के पश्तात् युधिष्ठिर ने देखा, घायलों की संख्या से ज्यादा वीरगति को प्राप्त होने वालों की संख्या है। जिसे देख कर वो चिंतित हो गए और उन्होंने वासुदेव श्री कृष्ण से कहा कि, केशव कल के युद्ध में क्या होगा इसपर भगवान ने युधिष्ठिर को जवाब दिया कि युद्ध भूमि तो किसी ना किसी को वीरगति को प्राप्त होना ही पड़ता है। किंतु तुम चिंता मत करो युधिष्ठिर, जिनके पक्ष में सर्वश्रेष्ठ धनुरधर हो और महाबली भीम जैसे योद्धा हों, उस पक्ष की जीत निश्चित है। इस विनाशकारी युद्ध के अंत में विजय आपकी ही होगी।

 

Live Blog

Highlights

    19:58 (IST)05 May 2020
    संजय के वचन सुन विचलित हुए धृतराष्ट्र

    धृतराष्ट्र और संजय बात कर रहे हैं कि अचानक आचार्य द्रोण ने ऐसा क्यों कहा कि आशीर्वादों के बल पर यह युद्ध नहीं जीता जा सकता। संजय कहते हैं कि आशीर्वाद पूजा का प्रसाद नहीं है महाराज जो हाथ फैलाए उसे दे दिया जाए। उन्होंने सच कहा है। धृतराष्ट्र कहते हैं कि मैं देख रहा हूं कि तुम्हारा सुर भी उन्हीं के साथ मिलता जा रहा है। धृतराष्ट्र गुस्से में कह रहे हैं कि मेरे पुत्र दुर्योधन को किसी ने विजय होने का आशीर्वाद नहीं दिया। मैं जानता हूं वह अकेला इस युद्ध में लड़ रहा है। संजय कहते हैं कि महाराज यह युद्ध का दसवां दिन है। इतिहास क्या कहता है आप यह बात अच्छी तरह जानते हैं महाराज धृतराष्ट्र। मैं सच कह नहीं पाऊंगा और आप सच जानते हैं। 

    19:51 (IST)05 May 2020
    अश्वत्थामा ने गुरुद्रोण से कहा मुझसे दुर्योधन के तंज नहीं सुने जाते

    गुरुद्रोण का पुत्र अश्वत्थामा अपने पिता के पास जाता है और उनसे सवाल करता है। पिता जी आप युद्ध किस की तरफ से कर रहे हैं। क्योंकि ये सवाल बार बार दुर्योधन मेरे सामने रखता है कि पितामह और गुरुद्रोण कौरवों की तरफ होने के बाद भी युद्ध पांडवों की ओर से कर रहे हैं। इसके बाद अश्वत्थामा से गुरुद्रोण ने कहा मेरी और भीष्म के अंदर की पीढ़ा तुम नहीं समझ सकते पुत्र। इस लिए मेरे आर्शीवाद से नहीं युद्ध अपनी क्षमता से लड़ो और जीतो।

    19:46 (IST)05 May 2020
    पितामह के वध के लिए अर्जुन ने मांगी शिखंडी से सहायता

    शिखंडी युद्ध में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। उनके पास अर्जुन आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। अंबा के रूप में शिखंडी भीष्म पितामह से अपने अपमान का बदला लेने के लिए युद्ध के मैदान में जाने के लिए तैयार हैं। अर्जुन कहते हैं कि शिखंडी मुझे आपसे कुछ चाहिए। आज के युद्ध में मुझे आपका साथ चाहिए। मैं आपकी सहायता के बिना पितामह से युद्ध जीत नहीं सकता। आप मेरे रथ पर चलना स्वीकार करेंगे महाराज। शिखंडी अर्जुन के साथ पितामह से युद्ध करने के लिए तैयार हो जाते हैं। वह कहते हैं कि तुम नहीं जानते मैं पितामह से युद्ध करने के लिए कितना व्याकुल हूं। 

    19:41 (IST)05 May 2020
    अपने युद्ध के अंतिम दिन भीष्म ने दासों को मुक्त किया

    भीष्म पितामह युद्ध के मैदान में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। साथ ही वह सेवकों को कह रहे हैं कि तुम दोनों ने मेरी सेवा ऐसे की है कि पुत्र हों। मैं तुम्हारी सेवा से बहुत खुश हूं। इसके बाद पितामह ने कहा कि तुम अब दास बंधन से मुक्त हो।

    19:39 (IST)05 May 2020
    अपनी मां गंगा से मिलनेे पहुंचे भीष्म

    अर्जुन और युधिष्ठिर को अपनी मृत्यु का रहस्य बताने के बाद, पितामह भीष्म अपनी मां गंगा से मिलने पहुंचे हैं। इस दौरान मां गंगा ने पितामह से कहा कि तुम हस्तिनापुर के लिए अपनी सेवाएं दे दे कर वृद्ध हो गए हो। कल तुम इस युद्ध भूमि में शिखंडी के सामने शस्त्र त्याग कर मुक्ति को प्राप्त होगे। इस लिए मैं भूमि का टुकड़ा ढूंढ रही हूं जिस पर तुम विश्राम कर सको।

    19:33 (IST)05 May 2020
    वासुदेव श्री कृष्ण ने पांडवों को बताया शिखंडी बनेंगी पितामह की मृत्यु की वजह

    पांडव भाई वासुदेव और द्रौपदी को पूरी बात बताते हैं। सभी चिंतित हैं कि पितामह के सामने युद्ध के मैदान में नारी कहां से लेकर आएं। द्रौपदी कहती हैं कि मैं पितामह का सामना करूंगी। युधिष्ठर कहते हैं कि पुरुषों के होते हुए नारी रणभूमि में जाए यह पुरुषों के लिए अपमान की बात होगी। द्रौपदी कहती हैं कि अगर मैं रणभूमि में चली भी जाऊं तो कौन-सा आकाश टूट पड़ेगा। वासुदेव कहते हैं कि तुम एक केवल नारी नहीं बल्कि समस्त समाज नारी का प्रतीक हो। तुम ऐसे नहीं जा सकतीं। हां, लेकिन शिखंडी को कोई रणभूमि में भीष्म पितामह के सामने जाने से नहीं रोक सकता। वह युधिष्ठर तुम्हारे लिए अर्ध पुरुष होंगे लेकिन पितामह के लिए नहीं। वह शिखंडी को देखकर तुरंत धनुष रख देंगे। इसके बाद वासुदेव अंबा और शिखंडी की कहानी बताते हैं। अंबा ने जन्म पर जन्म लिया और शिखंडी के रूप में आज हम सभी के सामने हैं। गंगा पुत्र भीष्म हैं वह, इसलिए रणभूमि में सामने खड़ी शिखंडी को अवश्य पहचानेंगे। 

    19:24 (IST)05 May 2020
    पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर और अर्जुन को बताया उनकी मृत्यु कैसे होगी

    भीष्म पितामह अपने शिविर में हैं। इतने में उनके पास युधिष्ठर और अर्जुन आते हैं। उन्हें प्रणाम करते हैं। भीष्म पितामह युधिष्ठर को विजयभव का आशीर्वाद देते हैं। युधिष्ठर कहते हैं कि हम यहां विजयभव का आशीर्वाद लेने नहीं आए हैं। हमें कोई आशीर्वाद न दीजिए पितामह। भीष्म पितामह चौंक जाते हैं। युधिष्ठर कहते हैं कि हमारी विजय के बीच स्वयं आप खड़े हैं। भीष्म कहते हैं कि मैं दी हुई वस्तु वापस नहीं ले सकता। पुत्र तुम मेरी बात न काटो, मेरा बांण काटो, मेरा धनुष काटो। लेकिन आशीर्वाद मैं तुमसे वापस नहीं ले सकता। वासुदेव भली भांति जानते हैं कि अंत में जीत उन्हीं की होगी। वह सब जानते हैं। वह जानते हैं कि तुम्हें और तुम्हारी जीत के बीच से इस गंगा पुत्र को हटाने का उपाय क्या है। अगर मेरे सामने कोई नारी आ जाए तो मुझे इस रणभूमि से बाहर किया जा सकता है। ऐसे में युधिष्ठर पूछते हैं कि युद्ध के मैदान में नारी कैसे आ सकती हैं पितामह। भीष्म कहते हैं कि यह तुम वासुदेव से जाकर पूछो।

    19:17 (IST)05 May 2020
    दोनों तरफ से टक्कर का चल रहा युद्ध

    एक ओर भीष्म पितामह और अर्जुन के बीच बांण चले। उधर सैनिक आपस में लड़ रहे हैं। मर रहे हैं। घायल हो रहे हैं। भीम और दुर्योधन के बीच युद्ध छिड़ा है। समय कहते हैं कि हर कोई यहां मर रहा है। सूर्यास्त हो चुका है। मैं अभी भी यहां खड़ा हूं। पता नहीं यह युद्ध कब खत्म होगा। होगा भी या नहीं, नहीं जानता। कभी पांडवों का पलड़ा भारी होता है तो कभी कौरवों का।

    19:07 (IST)05 May 2020
    26 पुत्रों के वीरगति प्रप्त करने से दुखी हुआ धृतराष्ट्र

    महाभारत के महासंग्राम में गांधारी और धृतराष्ट्र के 26 पुत्र अब तक वीर गति को प्राप्त हो चुके हैं। इस बात को सुनकर धृतराष्ट्र काफी उदास हो गए हैं। वहीं जैसे ही इस बात का गांधारी को पता चला वो फूट-फूट कर रहो रही हैं।

    19:05 (IST)05 May 2020
    दस पुत्रों के वीरगति प्रप्त करने से दुखी हुआ धृतराष्ट्र

    महाभारत के महासंग्राम में गांधारी और धृतराष्ट्र के दस पुत्र अब तक वीर गति को प्राप्त हो चुके हैं। इस बात को सुनकर धृतराष्ट्र काफी उदास हो गए हैं। वहीं जैसे ही इस बात का गांधारी को पता चला वो फूट-फूट कर रहो रही हैं।

    13:20 (IST)05 May 2020
    गांधारी ने सुनाया धृतराष्ट को अपना स्वप्न

    अपने दस पुत्रों के वीरगति को प्राप्त करने की खबर सुनकर गांधारी, धृतराष्ट्र से कहती हैं कि मैंने एक सपना देखा था। मैं एक वन में अकेली खड़ी हूं और मेरे चारों हरे भरे पेड़ कटे हुए। आप आए और बोले यहां से चलो गांधारी। मैंने आपसे पूछा कि हरे पेड़ किसने काटे हैं तो आपने कहा मैंने काटे हैं। मैंने पूछा कि कुल कितने पेड़ काटे हैं तो आपने कहा 100। यह सुनकर मैं डर गई। मैंने कहा कि आपने यह वृक्ष काटे हैं या फिर मेरे पुत्रों का शव।

    13:00 (IST)05 May 2020
    दस पुत्रों के वीरगति प्रप्त करने से दुखी हुआ धृतराष्ट्र

    महाभारत के महासंग्राम में गांधारी और धृतराष्ट्र के दस पुत्र अब तक वीर गति को प्राप्त हो चुके हैं। इस बात को सुनकर धृतराष्ट्र काफी उदास हो गए हैं। वहीं जैसे ही इस बात का गांधारी को पता चला वो फूट-फूट कर रहो रही हैं।

    12:50 (IST)05 May 2020
    भीम को दुर्योधन की सेना ने चारों तरफ से घेरा

    महाभारत का युद्ध इस वक्त अपनी चरम सीमा पर है। इस दौरान महाबली भीम को दुर्योधन की सेना सहित उसके छोटे भाइयों ने चारों तरफ से घर लिया है। लेकिन रणभूमि में दुशासन और दुर्योधन के लहू का प्यासा भीम एक एक कर दुर्योधन के अनुजों का वध कर रहा है।

    12:39 (IST)05 May 2020
    पितामह पर बरसा दुर्योधन

    पितामह भीष्म पर दुर्योधन इस बात को लेकर क्रोधित हो रहा है, क्योंकि उसके मुताबिक पितामह भीष्म जान बूझकर पांडवों का वध नहीं कर रहे हैं। इस दौरान पितामह ने पलटवार करते हुए दुर्योधन से कहा यदि तुम्हारे अलावा अगर कोई और कहता तो वो मेरे सामने अब तक जीवित नहीं रहने देता।  

    12:31 (IST)05 May 2020
    भगवान ने पितामह के वध के लिए उठाया शस्त्र

    पितामह भीष्म और अर्जुन के बीच युद्ध चल रहा है। इस दौरान भगवान अर्जुन पर क्रोधित हो उठे, क्योंकि अर्जुन पितामह से उनका वध करने के लिए युद्ध नहीं कर रहे हैं। भगवान ने अर्जुन से कहा यदि तुम पितामह का वध नहीं करोगे तो मैं कर दूंगा। उनके इन वचनों को सुनकर पितामह भीष्म ने कहा-वासुनदेव आपके हाथों मरना मेरा सौभाग्य होगा। आखिर अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर आपने शस्त्र उठा ही लिया मझे मारने के लिए।

    12:26 (IST)05 May 2020
    दुर्योधन ने कहा पितामह को सेनापति पद से हटाना होगा

    इच्छा मृत्यु का वरदान पाने वाले पितामह भीष्म के रहते दुर्योधन युद्ध हार नहीं सकते हैं और उनके रहते वो पांडवों पर वार करेंगे नहीं। इस बात से परेशान दुर्योधन ने कहा पितामह को प्रधान सेना पति के पद से हटाना पड़ेगा।

    12:18 (IST)05 May 2020
    सूर्यास्त्र के बाद ठहरा युद्ध

    महाभारत का युद्ध काफी जबरदस्त चल रहा है। इस दौरान पितामह भीष्म और अर्जुन दोनों  एक दूसरे को अपने- अपने बाणों से धराशाई करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। सूर्यास्त्र के पश्चात युद्ध की समाप्ति हो गई है। 

    12:12 (IST)05 May 2020
    पितामह भीष्म अर्जुन में हो रहा घमासान युद्ध

    पितामह भीष्म और अर्जुन में इस वक्त भीषण युद्ध देखने को मिल रहा है। जहां दोनों तरफ से बाणों की वर्षा देखने को मिल रही है। इस दौारन पितामह का एक तीर आकर वासुदेव श्री कृष्ण को भी आकर लगा है।

    12:02 (IST)05 May 2020
    युद्ध के अभी तक के परिणाम से द्रौपदी हुई खुश

    महाभारत के युद्ध में गंगा पुत्र भीष्म और अर्जुन के बीच घनघोर युद्ध होने वाला है। जिसे लेकर अर्जुन ने शंखनाद किया है। इस शंखनाद को सुनकर द्रौपदी समझ गई है कि ये युद्ध जरूर अर्जुन और पितामह के बीच होने वाला है। वहीं युद्धभूमि से आ रहे अभी तक के परिणाम से द्रौपदी संतुष्ट नजर आ रही है। 

    11:56 (IST)05 May 2020
    अर्जुन ने कहा पितामह भीष्म की मृत्यु आवश्यक

    पितामह भीष्म युद्धभूमि में अकेले ही कहर बरपा रहे हैं। इस दौरान अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से कहा कि यदि पितामह का वध नहीं किया तो वो हमें इस युद्ध में कभी विजय नहीं होने देंगे। इसके बाद भगवान ने अर्जुन का रथ पितामह की तरफ मोड़ दिया और अर्जुन ने पितामह को शंखनाद कर के युद्ध का आहवान किया है।

    11:51 (IST)05 May 2020
    पहले दिन का युद्ध समाप्त होने पर चिंतित हुए युधिष्ठिर

    महाभारत का पहले दिन का युद्ध समाप्त हो गया है। युधिष्ठिर अपने शिविर में वासुदेव श्री कृष्ण से कह रहे हैं कि पहले दिन घायलों से ज्यादा मरने वालों की गिनती है। इसके बाद भगवान ने उससे कहा अर्जुन और भीम जैसे योद्धा होने की वजह से आपकी विजय पक्की है। चिंता मत करिए कल सुबह यु्द्ध की प्रतिक्षा कीजिए।