बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री स्वस्तिका मुखर्जी का कहना है कि सेंसर बोर्ड ‘मूर्खतापूर्ण तरीके से’ काम करता है क्योंकि बोर्ड ने शुरूआत में एक बांग्ला फिल्म में उनके बोल्ड सीन काटने का सुझाव दिया था। स्वस्तिका ने कहा, ‘फिल्म ‘साहब बीवी और गुलाम’ में मेरा बीवी का किरदार दूसरे किरदारों से जुड़ा हुआ है और यह उनकी जिंदगियों में मायने रखता है। यह अंत में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेरे किरदार को मारकर वे (सेंसर बोर्ड) फिल्म को मार डालते। अगर यह सीबीएफसी के कुछ सदस्यों की मूर्खता नहीं है तो क्या है।’
हिन्दी फिल्म ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी’ की अभिनेत्री को लगता है कि बोर्ड का रवैया ‘हठी और रूढ़िवादी’ है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वही विचारधारा है कि महिलाएं सेक्स और यौन इच्छाओं के बारे में बात नहीं कर सकतीं या उस तरह से कल्पनाएं नहीं कर सकतीं जिस प्रकार मेरा किरदार करता है। अभिनेत्री ने कहा, ‘दर्शक और फिल्मकार क्यों नुकसान उठाएंं? साहब बीवी गुलाम एक समझ से भरी व्यवसायिक फिल्म है।’
बता दें, सेंसर बोर्ड ने जब उड़ता पंजाब में कई सारे कट्स लगाने का सुझाव दिया था, तब भी वह निशाने पर आया था। सेंसर बोर्ड ने अनुराग कश्यप की फिल्म उड़ता पंजाब टाइटल में से पंजाब शब्द भी हटाने का निर्देश दिया था। जिसके बाद फिल्ममेकर्स ने होईकोर्ट का दरवाजा खट्खटाया। होईकोर्ट ने फिल्म को एक कट के साथ रिलीज करने की मंजूरी दे दी।
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