बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा हाल ही में उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर गईं, जहां उन्होंने महादेव के दर्शन के साथ भस्म आरती में भी भाग लिया। इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो धार्मिक विवाद खड़ा हो गया।
जहां कई लोगों ने इसकी तारीफ की वहीं वहीं कुछ लोगों ने इसे धार्मिक दृष्टि से अनुचित बताया। इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की रही, जिसे मौलाना शाहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने सोशल मीडिया पर साझा किया। मौलाना ने कहा कि किसी मुस्लिम व्यक्ति का किसी अन्य धर्म के मंदिर में पूजा-अर्चना में शामिल होना इस्लामिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “गुनाह-ए-अज़ीम” करार दिया।
हालांकि, इस बयान का कोई कानूनी प्रभाव नहीं है और ना ही नुसरत भरूचा पर कोई फतवा या आधिकारिक कार्रवाई जारी नहीं की गई है।
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नुसरत भरूचा की इस यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस चल रही है। कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं, वहीं कई लोग उनके पक्ष में खड़े हैं और इसे व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का मामला बता रहे हैं।
अभिनेत्री ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह एक सामान्य दर्शन यात्रा थी और इसे किसी विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
नुसरत भरुचा ने शुभांकर मिश्रा के साथ बातचीत में एक बार धर्म को लेकर अपने विचार रखे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि मेरे लिए मेरा फेथ सच्चा है, इसलिए मैं धर्म से जुड़ी हूं और मजबूत हूं। मुझे पता है कि मुझे इसी रास्ते पर चलना है। जहां भी शांति मिले चाहे वो मंदिर हो, मस्जिद हो या गुरुद्वारा आपको वहां जाना चाहिए। नुसरत ने कहा था कि मैं नमाज पढ़ती हूं और वक्त मिले तो दिन में पांच बार नमाज पढ़ती हूं। सफर के दौरान भी नमाज के लिए चटाई साथ रखती हूं। मेरा मानना है कि ईश्वर एक है और उससे जुड़ने के मार्ग कई हैं। मैं सभी रास्तों को खोजना चाहती हूं।
