‘कभी तन्हाइयों में यूं’ जैसे हिट गानों के लिए पहचानी जाने वाली प्लैबैक सिंगर मुबारक बेगम का निधन हो गया है। 80 साल की मुबारक बेगम लंबे अरसे से बीमार चल रही थीं। बीते साल 2015 में बेटी की मौत के बाद से वह सदमे में थीं। उनके आर्थिक हालात भी कुछ ठीक नहीं चल रहे थे। मौत की खबर की पुष्टि करते हुए उनके परिवार के एक सदस्य ने बताया, ‘मुबारक बेगम अब हमारे बीच नहीं हैं। जोगेश्वरी स्थित अपने घर में रात साढे 9 बजे उन्होंने अंतिस सांसें लीं। वह काफी बीमार चल रही थीं।’

1950 और 60 के दशक में मुबारक बेगम की सुरीली आवाज का जादू हर तरफ छाया था। उस वक्त गाये उनके गोल्डन क्लासिक्स आज भी उनते ही मशहूर हैं और म्यूजिक लवर्स के लिए एक इंस्पिरेशन हैं। उन्होंने हमराही, हमारी याद आएगी, देवदास, मधुमती, सरस्वतीचंद्र जैसी कई हिट फिल्मों के गानों को अपनी आवाज से सजाया था। अपने सिंगिंग करियर के दौरान मुबारक बेगम ने एसडी बर्मन, शंकर जयकिशन और खैय्याम जैसे लगभग हर बड़े संगीतकार के साथ काम किया।

बदहाली और बीमारी से जूझ रही मुबारक बेगम को 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने एक लाख रुपए की मदद दी थी। लेकिन इसके बाद उन्हें कहीं और से किसी तरह की मदद नहीं मिली। मुबारक बेगम दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं लेकिन उनकी मखमली आवाज का जादू हमेशा कामय रहेगा और उन्हें सबके दिलों में जिंदा रखेगा।