4 अगस्त को हिंदी सिनेमा को एक ऐसा नायाब तोहफा मिला, जो अपने आप में एक बहुत ही खास था। ऐसा इसलिए क्योंकि ये अकेला एक सितारा था जो एक्टर भी था, सिंगर भी था, म्यूजिक डायरेक्टर भी था, गीतकार भी था, डायरेक्टर भी था, प्रोड्यूसर भी था और राइटर भी था नाम है किशोर कुमार। वही आवाज जिसने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, देव आनंद जैसे सुपरस्टार्स के लिए फैंन्स की लाइन लगवा दी। क्योंकि यही आवाज थी जो इन सभी स्टार्स के हिट गानों के पीछे होती थी। आज किशोर दा का जन्मदिन है। उनके जन्मदिन के मौके पर याद करेंगे उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे किस्से जो होठों पर हंसी ले आते हैं।
बचपन में आभास कुमार गांगुली नाम से पुकारे जाने वाले किशोर दा चार भाई बहन थे। लेकिन जब वो एक साल के थे तब बड़े भाई अशोक कुमार पढ़ाई के लिए बाहर चले गए थे। इसलिए किशोर दा को हमेशा यही लगता था कि वो तीन भाई बहन हैं। जब किशोर 4 साल के हुए तब बड़े भाई अशोक कुमार छुट्टियों में घर आए। किशोर कुमार घर आए इस मेहमान से अपरिचित थे। उन्हें कोई अंदाजा नहीं था कि आखिर इस मेहमान को इतनी तवज्जो क्यों दी जा रही है। मां का प्यार भी बंटने लगा था। एक दिन किशोर दा की मां ने खीर बनाई। अब क्योंकि खीर किशोर दा को भी बहुत पंसद थी। वो खीर के इंतजार में बैठ गए। लेकिन थोड़ी देर बाद देखा कि मां खीर से भरा कटोरा लाई और अशोक कुमार के आगे रख दिया। यह देखकर किशोर परेशान हो गए, झट से मां के पास पहुंचे और पूछा…मां ये हट्टा कट्टा मुश्टंडा कौन है? तुम इसे इतनी खीर क्यों दे रही हो? तब मां ने हंसकर उन्हें बताया कि वो तुम्हारे बड़े भाई हैं। तब जाकर किशोर दा को पता चला था कि वो चार भाई बहन हैं। किशोर दा ने झट से उन्हें गले लगाकर दादा मुनी कहा था। इसलिए अशोक कुमार का दादा मुनी नाम से भी जाना जाता था।

अपनी आवाज में एक से बढ़कर एक क्लासिक गाने देने वाले किशोर दा पैदाइशी सुरीले नहीं थे। अशोक कुमार ने अपने इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था कि बचपन में किशोर का गला बैठा हुआ था, ज्यादा खुलता नहीं था। लेकिन एक घटना की वजह से उनका ऐसा रियाज हुआ कि उनकी आवाज बदल गई। दरअसल एक बार उनकी मां रसोई में सब्जी काट रही थी। किशोर दा दौड़कर मां के पास जा रहे थे कि इतने में वहां रखी दरांती से उनके पैर की उंगली कट गई। डॉक्टरों ने उंगली का इलाज तो कर दिया लेकिन किशोर का दर्द नहीं गया। वो कई दिनों तक इस दर्द में जोर से जोर से रोया करते थे। इस तरह घंटों रोने से उनकी वोकल कॉर्ड्स पर असर पड़ गया और उनकी आवाज हस्की हो गई।

किशोर दा बतौर एक्टर हल्के फुल्के और सीरियस हर किस्म के रोल किया करते थे। लेकिन अपनी निजि जिंदगी में उनके कई ऐसे किस्से हैं जो किसी कॉमेडी फिल्म के सीन से कम नहीं लगते। क्या आप जानते हैं ऋषिकेश मुखर्जी किशोर कुमार और महमूद को अपनी फिल्म आनंद के लिए कास्ट करना चाहते हैं। जी हां क्लासिक फिल्म आनंद में किशोर कुमार हो सकते थे। अगर उस दिन उनके गेटकीपर में ऋषिकेश मुखर्जी को बंगाली ऑर्गेनाइजर समझकर भगाया ना होता। दरअसल उन दिनों कोई बंगाली ऑर्गेनाइजर उन्हें परेशान कर रहा था, तो किशोर दा ने गेटकीपर से कहा था कि बंगाली आए तो उसे अंदर ना आने देना। फिर क्या था ऋषिकेश दा आए तो गेटकीपर ने उन्हें बंगाली ऑर्गेनाइजर समझा और भगा दिया। इस तरह दोनों की मुलाकात नहीं हो पाई। बाद में महमूद भी कुछ कारणों की वजह से फिल्म नहीं कर पाए थे। तब फिल्म के लिए राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को फाइनल किया गया था।

जिस तरह लोग घर के बाहर ‘कुत्तों से सावधान’ का बोर्ड लगाते हैं। उसी तरह किशोर कुमार ने अपने घर के बाहर ‘किशोर से सावधान’ का बोर्ड लगाया हुआ था। यह बोर्ड उनके वार्डन रोड स्थित फ्लैट पर लगा था। एक बार इस घर के पहले मालिक और डायरेक्टर एचएस रवैल किशोर को पैसे देने पहुंचे। किशोर दा ने पैसे तो आराम से ले लिए लेकिन जब रवैल ने हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया तो उन्होंने उनका हाथ अपने मुंह में डाला और हल्के से काट कर पूछा…तुमने बाहर बोर्ड नहीं देखा? जब रवैल किशोर की बात समझे तो जोर से हंस पड़े।

किशोर दा की मजाक की आदतों से परेशान एक डायरेक्टर उनके खिलाफ कोर्ट चला गया था। ताकि वह कोर्ट से आदेश ला सके कि किशोर दा को डायरेक्टर के ऑर्डर फॉलो करने होंगे। शायद वो नहीं जानता था कि वो किससे पंगा ले रहा है। किशोर दा शूटिंग पर पहुंचे और तब तक गाड़ी से निकलने को इंकार कर दिया। कहा कि जब तक डायरेक्टर ऐसा करने का आदेश नहीं देंगे तब तक बाहर नहीं आउंगा। एक बार तो कार सीन शूट करते-करते वो खंडाला पहुंच गए थे। क्योंकि डायरेक्टर कट कहना भूल गया था।

किशोर कुमार को इंटरव्यू देना बिल्कुल पसंद नहीं था। वो लाइमलाइट से दूर रहना ज्यादा पसंद करते थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक जब भी कोई इंटरव्यू के लिए उनका पीछा करता था तो वो शूटिंग पर एक मैसेज छोड़कर छुपकर निकल जाते थे। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि किशोर दा ने अनवांटेड मेहमानों को दूर रखने के लिए अपने लिविंग रूम में हड्डियों और खोपड़ी की सजावट की हुई थी। उन पर लाल लाइट भी जलती थी, जिस वजह से वो और खतरनाक लगती थीं।

अपने मन की करने वाले किशोर दा पर एक बार ऑल इंडिया रेडियो ने बैन लगा दिया था। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक किशोर दा और इंदिरा गांधी के एक करीबी के बीच में कुछ मनमुटाव हो गया था। दरअसल इमरजेंसी के वक्त किशोर दा को गाने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने बंगाली में कुछ अपशब्द कहकर उस व्यक्ति को बाहर निकाल दिया था। उसी रिपोर्ट में यह बताया गया था कि तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला को किशोर दा का ये रवैया बिल्कुल पसंद नहीं आया था और उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर किशोर पर बैन लगा था।

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