अमिताभ बच्चन ने अपने फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं। याराना उन्हीं फिल्मों में से एक है। इस फिल्म के गानों ने भी काफी लोकप्रियता हासिल की थी। 70- 80 के दशक में अमिताभ बच्चन अपने काम के प्रति इतने जिम्मेदार थे कि जब उनकी फिल्मों के गाने बनाए जाते थे, वो रिकॉर्डिंग स्टूडियो में ही होते थे। 1981 में याराना के दौरान भी अमिताभ अक्सर शूटिंग खत्म होने के बाद घर नहीं जाते बल्कि रिकॉर्डिंग स्टूडियो चले जाते थे। लेकिन एक बार वो आउटडोर शूट पर थे और उन्होंने फिल्म का गाना, ‘छूकर मेरे मन को’ सुना तो वो बेहद नाराज़ हो गए थे और गाने के म्यूजिक कंपोजर राजेश रोशन को फोन कर उन्हें खरी खोटी सुना दी थी।

राजेश रोशन जो आज अपना 66 वां जन्मदिन मना रहे हैं, उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अपनी गानों से जुड़ी यादों को शेयर किया है। इसी दौरान उन्होंने याराना का यह किस्सा भी बताया। राजेश रोशन ने बताया, ‘इस गाने (छूकर मेरे मन को) के पीछे का इतिहास बहुत बड़ा है। अमिताभ बच्चन अपनी शूटिंग खत्म करने के बाद मेरे म्यूजिक रूम में हमेशा आते थे। जब ये गाना बन रहा था तब वो फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में कलकत्ता चले गए। वहां से उन्होंने एक सुबह मुझे कॉल किया और कहने लगे कि ये गाना बहुत ही फास्ट बना है और वो इसे शूट नहीं कर पाएंगे।’

राजेश रोशन ने आगे बताया, ‘मैंने उनसे कहा कि मुझ पर विश्वास रखिए और इसे शूट कीजिए। फोन पर मैं उनके गुस्से को महसूस कर सकता था। लेकिन फिर भी उन्होंने गाने को बिल्कुल वैसा ही शूट किया जैसा वो है। उनके पास वो पावर था कि वो निर्देशक राकेश कुमार और म्यूजिक डायरेक्टर से कहकर गाने को बदल देते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। किशोर कुमार ने जिस तरीके से इस गाने को गाया, उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।’

 

अमिताभ बच्चन और रेखा की फिल्म मिस्टर नटवरलाल का गाना ‘परदेसिया’ के म्यूजिक कंपोजर भी राजेश रोशन ही हैं। इस गाने से जुड़ी एक याद शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने लता मंगेशकर को पहाड़ों में शूट करने के लिए गाना गवाया था। उन्होंने बताया कि अमिताभ इस गाने के दौरान भी अक्सर स्टूडियो में आते थे और किशोर कुमार से कहते रहते थे कि राजेश रोशन ने म्यूजिक अच्छा दिया है तो आप अच्छा गाएंगे भी।

उन्होंने बताया, ‘वो अक्सर स्टूडियो आते और किशोर कुमार से बताते कि वो किस तरीके से इसे गा रहे हैं। मुझे आश्चर्य होता कि इतना बड़ा हीरो यहां क्यों आ रहा है क्योंकि उनकी वजह से मैं काम नहीं कर पा रहा था। वो मेरे पीछे खड़े होकर मुझसे कहते रहते कि मैंने अच्छा म्यूजिक बनाया है तो किशोर दा को भी सही से गाना चाहिए।’

 

लता मंगेशकर का जिक्र कर उन्होंने कहा, ‘लता मंगेशकर इस गाने को वैसा नहीं गा रही थीं जैसा कि हमें पहाड़ों के लिए चाहिए था। मैं उनके पास गया और उनके पैरों के पास बैठकर उनसे कहा कि आप इसे ऐसे गाइए जैसे कि आप किसी घाटी में हों और आप एक गांव की लड़की हैं जो पहाड़ों में गा रही है। इतना सुनकर लता मंगेशकर ने गाने को पूरी तरह बदल दिया। अमित जी खुश हो गए कि वो जो चाहते हैं, उन्हें वैसा ही गाना मिल गया।’