असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) के उस कथित फैसले का समर्थन किया, जिसमें स्कूल इतिहास की पुस्तकों से मुगल बादशाह अकबर और मैसूर शासक टीपू सुल्तान के नामों के आगे से “महान” शब्द हटाने की बात कही गई है। बोंगाईगांव में मीडिया से बातचीत के दौरान सरमा ने कहा कि यदि यह बदलाव लागू किया गया है तो यह “बहुत अच्छी बात” है। उन्होंने कहा, “मैंने अभी तक किताबें नहीं देखी हैं, लेकिन अगर NCERT ने यह किया है, तो मेरी तरफ से उन्हें धन्यवाद।”

टीपू सुल्तान पर तीखी टिप्पणी

बातचीत के दौरान सरमा ने टीपू सुल्तान पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, “Tipu-Ipu को मारो एकदम। जहां भेजना है, उधर भेज दो। समुद्र में फेंक दो।”

RSS नेता ने दी थी जानकारी

सरमा का यह बयान RSS नेता सुनील अंबेकर के एक दिन पहले दिए गए बयान के बाद आया। कानपुर में आयोजित ऑरेंज सिटी लिट्रेचर फेस्टिवल में अंबेकर ने दावा किया कि इतिहास की किताबों में संशोधन हुए हैं, और अब उनमें “अकबर द ग्रेट” या “टीपू सुल्तान द ग्रेट” जैसे उल्लेख नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों को बताना जरूरी है कि इतिहास में किन लोगों के कारण देश को पीड़ा सहनी पड़ी और किनके अत्याचारों का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

NCERT के इस संभावित बदलाव का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया। पार्टी सांसद इमरान मसूद ने कहा, “वे 700 साल तक शासन करते रहे। एक-दो दिन नहीं। आप नाम हटाते हैं तो इससे क्या हासिल होगा? उनके शासन में भारत का GDP 27% था और देश को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था।”

उन्होंने कहा कि आखिरी मुगल शासक ने ब्रिटिश शासन स्वीकार करने से इनकार किया और देश के सम्मान के लिए बलिदान दिया, जबकि “आज वही लोग सत्ता में आनंद ले रहे हैं जिन्होंने अंग्रेजों के आगे घुटने टेके थे।”

निष्कर्ष

NCERT द्वारा इतिहास की पुस्तकों में होने वाले संभावित बदलावों ने एक बार फिर इतिहास, विरासत और पाठ्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। जहां बीजेपी और RSS इससे सहमत नजर आ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे इतिहास से छेड़छाड़ बता रहा है।