अन्ना यूनिवर्सिटी को लेकर डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) की जांच में चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। शुरुआती जांच में पाया गया है कि अन्ना यूनिवर्सिटी के हजारों स्टूडेंट्स ने कथित तौर पर प्रोफेसरों को घूस देकर अपनी इंजीनियरिंग डिग्री हासिल की। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। एजंसी ने इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज करा दी है। एफआईआर में परीक्षा नियंत्रक जी.वी. उमा और नौ अन्य प्रोफेसरों को उत्तरपुस्तिकाओं की हेराफेरी करने के मामले में नामजद किया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की मई 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से जिन उम्मीदवारों ने दोबारा उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के लिए आवेदन किया था उनमें 40 फीसदी उम्मीदवारों को दोबारा जांच में अधिक अंत प्राप्त हुए थे। DVAC ने अपनी जांच में पाया है कि स्टूडेंट्स ने एक अप्रैल-मई 2017 के पेपर की दोबारा जांच के लिए 10 हजार रुपये (प्रति उत्तरपुस्तिका) की घूस दी।
लगभग 3,02,380 स्टूडेंट्स ने दोबारा कॉपियों की जांच के लिए आवेदन किया था। दोबारा जांच के बाद इनमें से 73,733 स्टूडेंट्स पास हुए और 16,636 को अधिक मार्क्स मिले। साल 2015 से 2018 के बीच उमा परीक्षा और रीवेलुएशन इन चार्ज थे। अन्ना यूनिवर्सिटी से 530 कॉलेज एफिलेटिड हैं। यूनिवर्सिटी सालाना लगभग 1.5 लाख स्टूडेंट्स का दाखिला करती है। एफआईआर में कहा गया है जी.वी. उमा, पी. विजयकुमार और आर सिवकुमार ने आन्सर स्क्रिप्ट में हेराफेरी करने और मार्क्स बढ़ाने के लिए पैसे लिए थे। इनके अलावा नामजद हुए अन्य सात लोग एग्जामिर्स हैं जिन पर यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग कॉलेज में रीवेलुएशन कॉर्डिनेट करने के आरोप हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा, “मुसीबत का पता लगते ही बड़ी तादाद में आन्सर स्क्रिप्ट तबाह कर दी जाती थीं।” हालांकि इस मामले में 100 स्क्रिप्ट्स बरामद की गई हैं।

