देश में बेहरत शिक्षा दिए जाने को लेकर बहस दशकों से चली आ रही है। शिक्षा के लिए दावे भी किए जाते हैं। लेकिन इस मुद्दे पर आई एक चौंका देने वाली रिपोर्ट कुछ और ही तस्वीर दिखला रही है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट की माने तो आठवीं के आधे छात्र गुणा भाग तक नहीं कर पाते हैं। जबकि पांचवीं के आधे बच्चे दूसरी का पाठ नहीं कर सकते हैं। यह रिपोर्ट देश के अलग अलग राज्यों के छात्रों को लेकर है। हालांकि इसमें सुधार भी है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में पढ़ने वाले चार में से एक बच्चा कक्षा आठ के बाद स्कूल छोड़ देता है। स्कूल छोड़ने वाले बच्चे के पास सही से पढ़ने की भी काबिलियत नहीं होती। वहीं, आठवीं तक स्कूल छोड़ने वाले कुछ बच्चों में 55.9 फीसदी को संखात्मक जानकारी नहीं होती। इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 से 16 साल के 13,1 प्रतिशत बच्चे स्कूल ही नहीं जाते। एएसईआर की यह 13वीं रिपोर्ट है। प्रथम नामक एनजीओ ने इसे मंगलवार को जारी किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि, कक्षा तीन में पढ़ने वाले एक तिहाई बच्चे ही ग्रेड लेवल पर हैं। इस क्लास के 27.2फीसदी बच्चे ही कक्षा दो की किताब पढ़ सकते हैं और 28.1 प्रतिशत बच्चे ही कक्षा दो का गुणा भाग करते हैं। देश के 596 जिलों के 17,730 गांव के पांच लाख 46 हजार 527 छात्रों के बीच किए गए सर्वे पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आज भी आठवीं कक्षा के 56 फीसदी बच्चे दो संख्याओं का आपस में भाग नहीं दे सकते। वहीं, भाग न दे सकने वाले पांचवीं के बच्चों की संख्या 72.2 फीसदी के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, पांचवीं कक्षा में 50.3 फीसदी बच्चे दूसरी कक्षा के लिए तैयार किए गए पाठ को पढ़ सकते हैं। वर्ष 2014 में पांचवीं के 48.1 फीसदी बच्चे ही ऐसा कर सकते थे।
हालांकि, इस रिपोर्ट में राज्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सुधार दर्शाया गया है। बीते चार साल में इन दो राज्य में 7.3 प्रतिशत और 3.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। हालांकि, बिहार के छात्र गुणा भाग के मामले में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के छात्रों से बेहतर हैं। बिहार में आठवीं कक्षा के 56.9 प्रतिशत बच्चे गुणा भाग कर सकते हैं।
वहीं , यूपी और उत्तराखंड के 44.4 फीसदी और 48.6 फीसदी बच्चे ही गुणा भाग कर सकते हैं। गुणा भाग की जानकारी रखने वाले सबसे ज्यादा बच्चे मणिपुर राज्य में हैं। राज्य में आठवीं के 72.5 फीसदी गुणा भाग आसानी से कर सकते हैं। वहीं, झारखंड में पिछले चार साल में स्तिथि नहीं सुधरी। झारखंड में पांचवी के केवल 34.4 फीसदी बच्चे ही दूसरी का पाठ पढ़ सकते हैं। यहीं हालात चार साल पहले भी थी।

