साइरस मिस्‍त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटाए जाने से पहले पद छोड़ने को कहा गया था। लेकिन मिस्‍त्री ने इससे इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि बोर्ड मीटिंग से ठीक पहले मिस्‍त्री को पद छोड़ने को कहा गया। मिस्‍त्री के इनकार के बाद जब मीटिंग में उन्‍हें हटाने का प्रस्‍ताव पास किया गया तो साइरस ने इसे अवैध करार दिया। बताया जाता है कि ऐसा कहकर मिस्‍त्री मीटिंग छोड़कर चले गए। गौरतलब है कि बोर्ड मीटिंग में रतन टाटा को चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन चुना गया था। साथ ही नए चेयरमैन के लिए कमिटी का गठन भी किया गया।

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रिपोर्ट्स के अनुसार मीटिंग में किस मुद्दे पर चर्चा होगी इस बारे में डायरेक्‍टर्स को बताया नहीं गया। आधे घंटे तक चली बैठक में चेयरमैन को बदलने के अलावा और किसी मुद्दे पर विचार नहीं हुआ। मीटिंग में केवल एक ही मुद्दे पर चर्चा हुई। एक अन्‍य प्रस्‍ताव के जरिए 70 साल की उम्र सीमा को समाप्‍त किया गया। इसके चलते रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन चुना गया। वहीं नए चेयरमैन की नियुक्ति तक चीफ ऑपरेट ऑफिसर फारुख नरीमन सुबेदार को ग्रुप को चलाने के लिए फाइनेंशियल पावर दी गई है। इससे पहले कहा गया था कि मिस्‍त्री ने टाटा रूल बुक की याद दिलाते हुए कहा कि बोर्ड मीटिंग में इस तरह का मसला उठाने से पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाता है। लेकिन बोर्ड ने कहा कि इस फैसले के पक्ष में उनके पास कानूनी राय है।

टाटा संस के प्रवक्‍ता ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया, ”बोर्ड ने सामूहिक बुद्धिमत्‍ता और प्रधान शेयरहोल्‍डर्स के सुझावों के आधार पर टाटा संस और टाटा ग्रुप के दीर्घका‍लीन हितों को ध्‍यान में रखते हुए बदलाव का फैसला किया है।” मिस्‍त्री 2012 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने थे। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले दूसरे ऐसे सदस्य थे जो टाटा परिवार से नहीं थे। उनसे पहले टाटा खानदान से बाहर के नौरोजी सक्लतवाला 1932 में कंपनी के प्रमुख रहे थे।