टाटा समूह के अध्यक्ष पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री ने आज टाटा के साथ अपनी लड़ाई में उसके एक निदेशक विजय सिंह का नाम वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से जोड़कर एक बड़ा विवाद पैदा कर दिया। सिंह ने इस आरोप का जोरदार खंडन किया। टाटा के साथ लड़ाई में उलझे मिस्त्री ने आरोप लगाया कि सिंह की अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में भूमिका थी क्योंकि जब यह हुआ तब वह 2010 में रक्षा सचिव थे। मिस्त्री के कार्यालय ने मुम्बई में एक बयान में कहा, ‘बतौर रक्षा सचिव सिंह वर्ष 2010 में अगस्तावेस्टलैंड को 3600 करोड़ रुपए का वीवीआईपी हेलीकॉप्टर अनुबंध देने में अहम अधिकारी थे। ’ सिंह ने यह कहते हुए इस आरोप का खंडन किया कि उनके सेवानिवृत्त हो जाने के बाद मंत्रिमंडल ने इस सौदे को मंजूरी दी थी।
उन्होंने ई-मेल से जारी अपने एक बयान में कहा, ‘‘मैं 2007-2009 के दौरान रक्षा सचिव था और जिस वर्तमान मामले को सीबीआई खंगाल रही है वह 2004-2005 का है। अगस्ता वेस्टलैंड खरीद को मंत्रिमंडल ने मेरी सेवानिवृत्ति के बाद मंजूरी दी थी। ’ टाटा संस बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक सिंह ने कहा, ‘‘इस मामले से मुझे जोड़ना मानहानिकारक एवं दुर्भावनापूर्ण है।’
पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने टाटा समूह के अध्यक्ष पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री के इस आरोप का जोरदार खंडन किया कि 3600 करोड़ रुपए के अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में उनकी भूमिका थी। सिंह ने कहा कि उनके सेवानिवृत्त हो जाने के बाद मंत्रिमंडल ने इस सौदे को मंजूरी दी थी। उन्होंने ई-मेल से जारी अपने एक बयान में कहा, ‘‘मैं 2007-2009 के दौरान रक्षा सचिव था और जिस वर्तमान मामले को सीबीआई खंगाल रही है वह 2004-2005 का है। अगस्ता वेस्टलैंड खरीद को मंत्रिमंडल ने मेरी सेवानिवृत्ति के बाद मंजूरी दी थी। ’’
मिस्त्री ने पहले आरोप लगाया था, ‘बतौर रक्षा सचिव सिंह 2010 में अगस्तावेस्टलैंड को 3600 करोड़ रुपए वीवीआईपी का हेलीकॉप्टर अनुबंध देने में शामिल अहम अधिकारी थे। ’टाटा संस बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक सिंह ने कहा, ‘‘इस मामले से मुझे जोड़ना मानहानिकारक एवं दुर्भावनापूर्ण है।’’
बता दें कि टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री ने इन आरोपों का खंडन किया है कि उन्होंने 2011 में नये चेयरमैन के चयन के लिए गठित समिति को भ्रमित किया था। साथ ही उन्होंने मिस्त्री ने पलटवार करते हुए कहा है कि समूह के पूर्व प्रमुख और वर्तमान कार्यवाहक चेयरमैन रतन टाटा के ‘व्यवहार से ‘टाटा के ब्रांड व मूल्य को ठोस नुकसान हुआ है।’ उल्लेखनीय है कि इससे पहले टाटा संस ने आज (रविवार, 11 दिसंबर) ही शेयरधारकों के नाम जारी एक अपील में मिस्त्री पर अपने वादों से मुंह मोड़ने और खुद को मिले अधिकारों का इस्तेमाल प्रबंधकीय ढांचे को कमजोर करने सहित कई आरोप लगाए है। मिस्त्री के कार्यालय ने इसके जवाब में कहा है,‘ एक झूठ को हजार बार सच की तरह बोलो तो उसे सच मान लिया जाएगा और लगता है कि अपनी करतूतों से उत्पन्न भारी संकट से उबरने का यह रतन टाटा का अंतिम प्रयास है।’ वहीं मिस्त्री के कार्यालय के बयान में टाटा संस की ओर से लगाए गए आरोपों को ‘रतन टाटा का मिथ्या प्रलाप बताया और कहा कि ये बातें बीते सप्ताहों में प्रवक्ताओं के जरिए कहलाई जा रही हैं।

