NFO Alert, Groww Nifty PSE ETF : ग्रो म्यूचुअल फंड ने एक नई एक्सचेंज ट्रेडेड फंड स्कीम लॉन्च की है, जो निवेशकों को सरकारी कंपनियों के शेयर्स में निवेश का मौका देगी। ग्रो निफ्टी PSE ETF के नाम से पेश यह स्कीम उन निवेशकों के लिए है, जो सरकारी कंपनियों के शेयरों में सीधे निवेश करने की जगह उनमें इंडेक्स के जरिये पैसे लगाना चाहते हैं। इस एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के न्यू फंड ऑफर में सब्सक्रिप्शन आज यानी 22 जनवरी 2026 को खुला है और 5 फरवरी 2026 तक जारी रहेगा। 

Groww Nifty PSE ETF की निवेश रणनीति

ग्रो निफ्टी पीएसई ईटीएफ एक ओपन-एंडेड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड होगा, जो Nifty PSE Index – TRI को ट्रैक करेगा। यानी यह स्कीम निफ्टी पीएसई टोटल रिटर्न इंडेक्स में शामिल सरकारी कंपनियों के शेयर्स में ठीक उसी रेशियो में निवेश करेगी, जिस अनुपात में उन्हें इस इंडेक्स में शामिल किया गया है। इस स्कीम का उद्देश्य इन कंपनियों में निवेश के जरिये लॉन्ग टर्म कैपिटल ग्रोथ हासिल करना है, हालांकि यह रिटर्न इंडेक्स के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और इसमें ट्रैकिंग एरर की गुंजाइश भी रहेगी।

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भारत की ग्रोथ में सरकारी कंपनियों का रोल

पिछले एक दशक में भारत की इकनॉमिक ग्रोथ में काफी बदलाव आए हैं। अब यह ग्रोथ ज्यादा कैपिटल इंटेंसिव हो गई है, जहां सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, ट्रांसपोर्ट, डिफेंस और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में भारी निवेश किया जा रहा है। जीडीपी के रेशियो के तौर पर सरकारी कैपिटल एक्सपेंडीचर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में लॉन्ग टर्म एसेट्स पर फोकस बना हुआ है।

पब्लिक सेक्टर कंपनियों का मजबूत आधार 

देश के विकास के लिए जरूरी बड़े और लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए जिस तरह की तकनीकी क्षमता, अनुभव और फंडिंग की जरूरत होती है, वह पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के पास पहले से मौजूद है। दशकों के लंबे तजुरबे, मजबूत बैलेंस शीट और नेशनल डेवपलमेंट के गोल्स के साथ सीधा जुड़ाव इन्हें और भी खास बनाता है। Nifty PSE Index में ऐसी ही लिस्टेड सरकारी कंपनियों को शामिल किया जाता है, जिनमें मेजॉरिटी शेयर होल्डिंग यानी बहुमत हिस्सेदारी केंद्र या राज्य की सरकारों के पास होती है।

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Nifty PSE Index का स्ट्रक्चर और पिछला प्रदर्शन

Nifty PSE Index में अधिकतम 20 कंपनियां शामिल होती हैं, जिनका सेलेक्शन Nifty 500 यूनिवर्स से फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर किया जाता है। इस इंडेक्स को साल में दो बार री-बैलेंस किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो इस इंडेक्स ने मीडियम से लॉन्ग टर्म में काफी प्रतिस्पर्धी रिटर्न (Competitive Return) दिए हैं, जिसकी बड़ी वजह हैं इन कंपनियों के बेहतर होते फंडामेंटल्स और ऑपरेटिंग लीवरेज।

PSU को मिलता है पॉलिसी सपोर्ट 

पिछले कुछ वर्षों में सरकारी कंपनियों के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल डेटा में काफी सुधार देखने को मिला है। रेवेन्यू और मुनाफे में बढ़ोतरी, ऑपरेशनल एफिशिएंसी, बेहतर कैपिटल एलोकेशन और प्राइसिंग डिसिप्लिन इसके अहम कारण रहे हैं। इसके साथ ही सरकार की नीतियां भी इन कंपनियों को सपोर्ट करती हैं। मिसाल के तौर पर मल्टी-ईयर इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन, डिफेंस इंडिजनाइजेशन, एसेट मॉनेटाइजेशन और एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़े कदम।

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ग्रो म्यूचुअल फंड के सीईओ वरुण गुप्ता ने इस नई स्कीम के लॉन्च के मौके पर कहा, “भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अर्थव्यवस्था के कई अहम हिस्सों में बड़ी भूमिका निभाती हैं, खासकर तब जब देश में लॉन्ग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रैटजिक प्रोजेक्ट्स पर काफी काम हो रहा है। अपने बड़े साइज, लंबे अनुभव और लॉन्ग टर्म सोच के कारण ये कंपनियां ऐसे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की क्षमता रखती हैं। साथ ही इस सेगमेंट की कंपनियों के वैल्यूएशन भी तुलनात्मक रूप से वाजिब दिख रहे हैं। ऐसे में Groww Nifty PSE ETF के जरिये निवेशकों को इस सेगमेंट में निवेश का एक आसान और ट्रांसपेरेंट मौका मिल रहा है।”

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किनके लिए सही है यह स्कीम

यह ETF उन निवेशकों के लिए सही ऑप्शन हो सकती है, जो सरकारी कंपनियों में इंडेक्स के जरिये लंबी अवधि यानी कम से कम 5 साल या उससे ज्यादा समय के लिए पैसे लगाना चाहते हैं। हालांकि इक्विटी में निवेश करने के कारण इस पर बाजार से जुड़े उतार-चढ़ाव का पूरा असर पड़ेगा, इसलिए निवेश से पहले इस जोखिम को समझना और अपनी रिस्क उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।

NFO की बड़ी बातें

  • स्कीम का नाम : Groww Nifty PSE ETF
  • स्कीम का टाइप : ओपन-एंडेड ETF
  • बेंचमार्क इंडेक्स  : Nifty PSE Index (TRI) 
  • NFO पीरियड : 22 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक
  • स्कीम फिर से खुलने की तारीख : 19 फरवरी 2026 या उससे पहले
  • कम से कम निवेश : 500 रुपये और उसके बाद 1 रुपये के मल्टिपल में
  • एग्जिट लोड : कुछ नहीं
  • रिस्क लेवल : बहुत अधिक (Very High)
  • फंड मैनेजर: निखिल साटम, आकाश चौहान और शशि कुमार

(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं. निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और सेबी से मान्यताप्राप्त इनवेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह लेकर ही करें.)