Budget 2026 : Demand to Increase LTCG Exemption to Rs 2 lakh: केंद्र सरकार के बजट 2026 से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को बड़ी उम्मीदें हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी AMFI ने सरकार से मांग की है कि इक्विटी निवेश पर मिलने वाली लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी जाए। अभी यह सीमा कम होने की वजह से छोटे निवेशकों पर भी टैक्स का बोझ बढ़ रहा है। इंडस्ट्री का मानना है कि अगर टैक्स नियमों में थोड़ी राहत दी जाती है तो इससे लंबे समय तक निवेश करने की आदत को बढ़ावा मिलेगा और आम निवेशक को भी फायदा होगा।
टैक्स नियमों में क्या हुए बदलाव
केंद्र सरकार के पिछले दो बजट में म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट से जुड़े टैक्स नियमों में कई बदलाव किए गए। जुलाई 2024 में पेश किए गए बजट में सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स सिस्टम में बदलाव किया। डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Fund) पर इंडेक्सेशन का फायदा (Indexation Benefit) खत्म कर दिया और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT में भी संशोधन किया। इन बदलावों का असर रिटेल इनवेस्टर्स के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) पर भी पड़ा। खास तौर पर डेट फंड निवेशकों के लिए टैक्स का बोझ बढ़ गया क्योंकि अब डेट फंड्स से होने वाली इनकम पर स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है।
LTCG पर मौजूदा नियम
इस समय इक्विटी शेयर्स और इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। यह टैक्स तब देना होता है जब साल भर में मुनाफा 1.25 लाख रुपये से ज्यादा हो जाए। यानी अगर किसी निवेशक को 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा होता है तो उस पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन इससे ज्यादा कमाई पर टैक्स देना जरूरी है। वहीं, डेट फंड पर ऐसा कोई बेनिफिट नहीं है।
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AMFI की मुख्य मांग क्या है
AMFI ने सरकार से मांग की है कि LTCG की टैक्स फ्री लिमिट को बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाए। इसके साथ ही इंडस्ट्री बॉडी ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर कोई निवेशक इक्विटी म्यूचुअल फंड में 5 साल से ज्यादा समय तक पैसा लगाए रखता है, तो उस पर मिलने वाले LTCG को पूरी तरह टैक्स फ्री किया जाए। AMFI का कहना है कि टैक्स छूट की मौजूदा लिमिट महंगाई और लोगों की बढ़ती आमदनी के मुकाबले बहुत कम है। अब ज्यादा लोग शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं, ऐसे में टैक्स नियमों को भी उसी हिसाब से बदलना जरूरी है।
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लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने पर जोर
इंडस्ट्री का मानना है कि अगर लंबे समय के निवेश से होने वाले मुनाफे पर टैक्स में राहत दी जाती है, तो लोग जल्दी-जल्दी पैसा निकालने से बचेंगे। इससे बाजार में स्टेबिलिटी आएगी और निवेशक अपने फाइनेंशियल गोल को ध्यान में रखकर बेहतर ढंग से निवेश करेंगे। AMFI का मानना है कि ऐसा करके घरेलू बचत को इक्विटी मार्केट की ओर मोड़ा जा सकता है और इससे फाइनेंशियल इनक्लूजन और वेल्थ क्रिएशन के सरकार के उद्देश्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
डेट फंड पर फिर से मिले इंडेक्सेशन बेनिफिट
डेट फंड्स में निवेश पर होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर मिलने वाले इंडेक्सेशन बेनिफिट को साल 2023 में खत्म कर दिया गया। इसके बाद से डेट फंड से होने वाली कमाई पर निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगने लगा, चाहे निवेश कितने भी समय के लिए किया गया हो। AMFI की मांग है कि इस नियम को बदलकर 36 महीने से ज्यादा होल्ड किए गए डेट फंड पर इंडेक्सेशन बेनिफिट फिर से बहाल किया जाए। इससे सीनियर सिटीजन्स और निवेश पर कम रिस्क लेने वाले दूसरे निवेशकों को राहत मिलेगी और डेट फंड्स में निवेश बढ़ेगा। साथ ही इससे कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को भी मजबूती मिल सकती है।
