Long Term Investment Strategy : शेयर बाजार हो या प्रॉपर्टी इनवेस्टमेंट – निवेशकों की नजर हमेशा मुनाफा कमाने पर रहती है. लेकिन मुनाफा मिलेगा या नहीं, यह काफी हद तक निवेश के सही फैसले पर निर्भर होता है. अगर फैसला गलत हुआ तो सारी फाइनेंशियल प्लानिंग पटरी से उतर सकती है. निवेश से जुड़े कई ऐसे नियम हैं, जो सही फैसला लेने में आपकी मदद कर सकते हैं. ऐसा ही एक नियम है 7% का नियम (7% Rule). इस नियम का फायदा स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग से लेकर रिटायरमेंट प्लानिंग और प्रॉपर्टी में निवेश तक उठाया जा सकता है. बशर्ते आप इस नियम को ठीक से समझें और इसे आंख मूंदकर फॉलो करने की बजाय एक टूल की तरह इस्तेमाल करें.

स्टॉक मार्केट में कैसे यूज करें 7% का रूल 

ट्रेडिंग करते समय सेंटिमेंट्स में बहकर फैसला करना गलत होता है. कई बार स्टॉक्स या निवेश की वैल्यू घटने पर निवेशक स्टॉप लॉस (Stop Loss) को सही ढंग से लागू करने की बजाय रिकवरी की उम्मीद में इंतजार करते रहते हैं. जिससे उनका नुकसान और बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए स्टॉक मार्केट इनवेस्टमेंट में 7% रूल को अपनाएं. इसका मतलब ये है कि आपने कोई शेयर जिस प्राइस पर खरीदा है, उससे 7% नीचे गिरने पर उसे बेच दें. यानी 7% का स्टॉप लॉस लगाएं. इससे आप बड़े नुकसान से बच सकते हैं.

स्टॉप लॉस के लिए 7% की लिमिट इसलिए रखी गई है, क्योंकि आंकड़ों पर आधारित कई रिसर्च में ये पाया गया है कि अगर बाजार आमतौर पर सामान्य हो, तो किसी खास शेयर में 7-8% से ज्यादा गिरावट के पीछे उस कंपनी से जुड़ी कोई गंभीर दिक्कत हो सकती है. ऐसे में 7% गिरावट एक अलार्म की तरह काम करती है. जिसके टच करते ही उस स्टॉक से निकल जाने पर ट्रेडिंग में डिसिप्लिन आता है. सही समय पर किया गया ये एग्जिट आगे होने वाले भारी नुकसान से बचाता है.

स्टॉक मार्केट और शेयर की चाल पर भी गौर करें

स्टॉप लॉस के लिए 7% का नियम स्टेबल ब्लू-चिप स्टॉक्स के लिए काफी सही है. लेकिन हर शेयर एक जैसा नहीं होता. कुछ स्टॉक्स आमतौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले होते हैं. ऐसे में कुछ स्टॉक्स में 7% की जगह कभी-कभी 9-10% का स्टॉप लॉस भी रखना पड़ सकता है. यानी स्टॉप लॉस के लिए 7% के नियम का इस्तेमाल स्टॉक मार्केट और शेयर की चाल देखकर करें.

Also read : Mutual Fund: मल्टी-एसेट फंड में क्यों करें निवेश? सबसे अच्छी स्कीम चुनने के लिए इन 5 बातों पर दें ध्यान

प्रॉपर्टी सेलेक्शन में 7% रिटर्न का रूल 

अगर आप किराये पर देने के लिए प्रॉपर्टी (Property) खरीदना चाहते हैं, तो इस रूल से तुरंत अंदाजा लग जाता है कि डील फायदेमंद है या नहीं. इसके अनुसार किसी भी प्रॉपर्टी से एक साल में मिलने वाली रेंटल इनकम प्रॉपर्टी की वैल्यू के कम से कम 7% के बराबर होनी चाहिए. यानी अगर किसी घर या दुकान की कीमत 1 करोड़ रुपये है, तो उससे एक साल में कम से कम 7 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए. यह रूल प्रॉपर्टी खरीदते समय अच्छे ऑप्शन की पहचान करना आसान बनाता है.

रिटायरमेंट के बाद 7% विदड्रॉल का रूल

रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) में एक बड़ा मसला ये होता है कि रिटायरमेंट फंड में जमा पैसे कितने साल तक चल पाएंगे? इस मामले में भी 7% का रूल इस्तेमाल किया जा सकता है. यहां इस रूल का मतलब ये है कि आपको पहले साल में अपनी कुल रिटायरमेंट सेविंग का 7% से ज्यादा हिस्सा नहीं निकालना चाहिए. यानी अगर आपके पास 1 करोड़ रुपये हैं, तो पहले साल ज्यादा से ज्यादा 7 लाख रुपये ही निकालने चाहिए. आगे चलकर महंगाई के असर को देखते हुए इसमें थोड़ी बढ़ोतरी कर सकते हैं.

Also read : Investment Tips: कामयाबी के 7 मंत्र, सफल निवेशक बनने के लिए क्या करें और क्या न करें

संभलकर अपनाएं 7% विदड्रॉल का रूल

हालांकि रिटायरमेंट कॉर्पस से 7% विदड्रॉल का रूल काफी एग्रेसिव है, जिस पर काफी संभलकर अमल करना चाहिए. अगर कॉर्पस की बची रकम पर रिटर्न थोड़ा कम मिले या बाजार में गिरावट आ जाए तो एक साल में इतने पैसे निकालना आपके फंड को जल्दी खत्म कर सकता है. खासकर अगर रिटायरमेंट के बाद लंबे समय तक उस फंड पर निर्भर रहना हो. अगर इसकी जगह आप साल में 4% विदड्रॉल से शुरू करें तो लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर होगा. यानी यहां भी 7% के रूल को अपने निवेश पर मिल रहे रिटर्न और आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लागू करें.

नियम से सिर्फ मदद लें, उसके भरोसे न रहें

कुल मिलाकर बात ये है कि 7% का रूल स्टॉक इनवेस्टमेंट, प्रॉपर्टी की खरीद और रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे तीन बड़े फाइनेंशियल मामलों में आपकी मदद तो कर सकता है. लेकिन इस रूल का सही फायदा तभी मिलेगा, जब आप उसे बाजार के हालात और अपनी जरूरतों के हिसाब से हिसाब से एडजस्ट करके इस्तेमाल करेंगे.