भारत के बीमा क्षेत्र में अब तक से सबसे बड़े विलय एवं अधिग्रहण के सौदे में एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ ने शुक्रवार (17 जून) को मैक्स लाइफ और मैक्स फिनांशल सर्विसेज के अपने साथ विलय का प्रस्ताव किया है ताकि एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की परिसंपत्ति के साथ एक इकाई तैयार की जा सके। एचडीएफसी ने स्टाक एक्सचेंज एनएसई को बताया, ‘एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और मैक्स फिनांशल सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक मंडलों ने परस्पर बातचीत की गोपनीयता, निजता और यथा स्थिति रखने के समझौता के प्रस्ताव को मंजूरी दी हैै जिसके अंतर्गत मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और मैक्स फिनांशल सर्विसेज लिमिटेड को विलय की प्रक्रिया के तहत एचडीएफसी लाइफ में जोड़ने की संभावना तलाशी जाएगी।’
एचडीएफसी लिमिटेड ने एक बयान में कहा कि मैक्स लाइफ और मैक्स फिनांशल सर्विसेज के एक योजना के तहत एचडीएफसी लाइफ में विलय की संभावना तलाशी जाएगी। विलय के बाद बनी इकाई का कुल प्रीमियम कारोबार करीब 26,000 करोड़ रुपए वार्षिक तक पहुंच जाएगा और इसके प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति एक लाख करोड़ रुपए से अधिक होगी।
निजी जीवन बीमा क्षेत्र में अभी सिर्फ आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के पास की एक लाख करोड़ रुपए की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति है। एडिनबर्ग की स्टैंडर्ड लाइफ पीएलसी की एचडीएफसी लाइफ में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है जिसमें एचडीएफसी की हिस्सेदारी 61.63 प्रतिशत है। मार्च 2016 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान एचडीएफसी लाइफ का कुल प्रीमियम कारोबार 16,314 करोड़ रुपए और प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति 74,247 करोड़ रुपए थी।
मैक्स फिनांशल सर्विसेज ने एक अलग सूचना में कहा है कि इस समझौते के तहत दोनों पक्ष आपस में यह तय करेंगे कि संबद्ध पक्षों के बीच प्रस्तावित सौदे की विधिवत जांच पड़ताल के लिए बातचीत को केवल दोनों पक्षों के बीच रखने की अवधि क्या रखी जाए। प्रस्तावित सौदे के लिए शेयरधारकों के साथ साथ विनियामकों और उच्च न्यायालय की भी मंजूरी लेनी पड़ेगी।
मैक्स लाइफ मित्सुई सुमितोमो इंश्योरेंस कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम कंपनी है। मैक्स फिनांशल की मैक्स लाइफ में 68 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि मित्सुई सुमितोमो का 26 प्रतिशत स्वामित्व है। मैक्स लाइफ का प्रीमियम संग्रह मार्च 2016 को समाप्त वर्ष के दौरान 9,216 करोड़ रुपए रहा और उसकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति 35,824 करोड़ रुपए थी। भारत में फिलहाल बीमा क्षेत्र में 49 प्रतिशत विदेशी निवेश की मंजूरी है। देश में 24 जीवन बीमा कंपनियां जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एलआईसी भी शामिल है जिसकी बाजार हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है।
