नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एलईडी बल्ब को प्रोत्साहित करने के लिए सीएफएल आधारित सौर लाइटिंग प्रणाली पर सब्सिडी रोकने का फैसला किया है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि मंत्रालय ने सीएफएल आधारित सौर लाइटिंग प्रणाली के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता रोक दी है और यह सब्सिडी एलईडी आधारित सौर लाइटिंग प्रणाली के लिए उपलब्ध होगी। डोमेस्टिक इफिशिएंट लाइटिंग प्रोगाम (डीईएलपी) के तहत सरकार बिजली वितरण कंपनियों के जरिए 3.27 करोड़ एलईडी बल्ब पहले ही वितरित कर चुकी है।

सार्वजनिक क्षेत्र की एनर्जी इफिशिएंशी सर्विसेज डीईएलपी योजना के तहत वितरण के लिए एलईडी बल्बों की खरीद कर रही है। कंपनी ने जून में 73 रुपए के भाव पर एलईडी बल्ब खरीदे जबकि फरवरी 2014 में यह 310 रुपए था। हाल ही में बिजली, कोयला व नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए ईईएसएल द्वारा खरीदे जाने वाले एलईडी बल्ब का भाव 44 रुपए प्रति इकाई पर लाने का लक्ष्य रखा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीएफएल के मुकाबले एलईडी के कई लाभ हैं क्योंकि यह पर्यावरण अनुकूल है और यह अधिक समय तक चलता है। साथ ही सीएफएल में मर्करी की मात्रा होने से इसका निपटान मुश्किल होता है। डीईएलपी के तहत सरकार सभी 77 करोड़ परंपरागत (इनकानडेसेंट) बल्बों की जगह एलईडी बल्ब लगाना चाहती है। इससे 20,000 मेगावाट लोड में कमी आएगी और 105 अरब किलोवाट ऊर्जा बचत होगी। साथ ही ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 8 करोड़ टन सालाना की कमी आएगी। इससे चार रुपए प्रति किलोवाट के हिसाब से बिजली के बिल में 40,000 करोड़ रुपए की कमी आएगी।