साइरस मिस्त्री को सोमवार को टाटा इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर पद से हटाने का फैसला लिया गया है। यह फैसला मिस्त्री को हटाने के लिए बुलाई गई एक जनरल मीटिंग में हुई वोटिंग के बाद लिया गया। इससे पहले साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाया गया था, जिसके बाद अब टाटा ग्रुप उन्हें दिए गए अन्य पदों से भी बेदखल कर रही है। जानकारी के मुताबिक, साइरस मिस्त्री को डायरेक्टर के पद से हटाने के लिए सोमवार को टाटा ग्रुप की छह कंपनियों ने एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई। इस मीटिंग में अधिकतर शेयरहोल्डर्स ने मिस्त्री को हटाने के पक्ष में वोटिंग की।
टाटा संस के अतंरिम चेयरमैन रतन टाटा ने भी पिछले हफ्ते शेयरहोल्डर्स से मिस्त्री को हटाने में सहयोग करने की अपील की थी। उन्होंने पत्र लिखकर शेयरहोल्डर्स से कहा था कि टाटा समूह के बोर्ड में मिस्त्री का बना रहना समूह की सफलता में गंभीर रुकावट है। गौरतलब है कि मिस्त्री को पिछले महीने के आखिर में टाटा संस के चेयरमैन पद से अचानक से हटा दिया गया था, जिसके बाद रतन टाटा को चार माह के लिए अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है। नए चेयरमैन की तलाश के लिए पांच सदस्यों की एक समिति बनाई गई है, जिसमें रतन टाटा स्वयं शामिल हैं।
टाटा ग्रुप के डायरेक्टर पर लगाए घोटाले से जुड़े होने के आरोप:
साइरस मिस्त्री ने रविवार को टाटा के साथ अपनी लड़ाई में उसके एक निदेशक विजय सिंह का नाम वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से जोड़कर एक बड़ा विवाद भी पैदा किया था। मिस्त्री ने आरोप लगाया था कि सिंह की अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में भूमिका थी क्योंकि जब यह हुआ तब वह 2010 में रक्षा सचिव थे। मिस्त्री के कार्यालय ने मुम्बई में एक बयान में कहा था, ‘बतौर रक्षा सचिव सिंह वर्ष 2010 में अगस्तावेस्टलैंड को 3600 करोड़ रुपए का वीवीआईपी हेलीकॉप्टर अनुबंध देने में अहम अधिकारी थे। ’ सिंह ने यह कहते हुए इस आरोप का खंडन किया कि उनके सेवानिवृत्त हो जाने के बाद मंत्रिमंडल ने इस सौदे को मंजूरी दी थी।

