Budget 2026 : देश का कृषि क्षेत्र एक बार फिर बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को जब वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नया बजट पेश करेंगी, तब किसानों, एग्री-बिजनेस और कृषि बाजार से जुड़े स्टेकहोल्डर्स की नजर इस बात पर होगी कि इस बार सरकार किसानों की आमदनी और खेती की ग्रोथ रेट बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। जीडीपी में लगभग 17 प्रतिशत का योगदान करने वाला कृषि क्षेत्र बीते एक साल से दबाव में है और अब ग्रोथ, रिसर्च और इनकम बढ़ाने पर खास फोकस किए जाने की जरूरत पर शिद्दत से महसूस की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैरिफ को लेकर जारी रस्साकशी की वजह से भी बजट में एग्रीकल्चर को पूरा सपोर्ट दिया जाना जरूरी हो गया है, ताकि हमारे किसान दुनिया की होड़ में मजबूती से टिक सकें।

कृषि ग्रोथ में सुस्ती बनी बड़ी चिंता

आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि खेती की रफ्तार अर्थव्यवस्था के बाकी सेक्टर्स से पीछे छूट रही है। जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश की जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वास्तविक ग्रोथ रेट (2011-12 की कीमतों के आधार पर) सिर्फ 3.1 प्रतिशत आंकी गई है। पिछले साल यही ग्रोथ 4.6 प्रतिशत थी। मौजूदा कीमतों (Current Prices) के आधार पर देखें, तो कृषि की जीवीए ग्रोथ महज 0.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 10.4 प्रतिशत थी। यानी इस तरह से देखने पर स्थिति और भी नाजुक नजर आती है। यही वजह है कि बजट में एग्रीकल्चर सेक्टर को संभालने के लिए बड़े कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है।

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बजट बढ़ा, लेकिन असर सीमित

बीते कुछ बरसों के दौरान कृषि और किसान कल्याण विभाग के बजट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2024 के संशोधित अनुमानों में यह एलोकेशन करीब 1.25 लाख रुपये करोड़ रहा, जबकि 2025 के बजट अनुमान में यह 1.22 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर प्रोडक्टिविटी और इनकम वैसी मजबूती नहीं दिख रही है, जिसकी जरूरत है। 

रिसर्च और इनोवेशन पर फोकस जरूरी

देश में इनोवेशन के लिए बेहतर इकोसिस्टम पर जोर देने की बातें काफी होती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि देश में रिसर्च और डेवलपमेंट पर होने वाला खर्च जीडीपी के सिर्फ 0.7 प्रतिशत के बराबर ही है। वहीं, चीन, अमेरिका और यूरोप में इस पर काफी अधिक निवेश किया जाता है। उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में कृषि रिसर्च के लिए फंड बढ़ाया जाएगा और निजी क्षेत्र को भी दोबारा टैक्स इंसेंटिव देकर रिसर्च में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। क्लाइमेट चेंज की आशंकाओं को देखते हुए हाई-यील्ड और क्लाइमेट-रेजिलिएंट बीजों के लिए इनवेस्टमेंट बढ़ाना भी काफी अहम माना जा रहा है।

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मार्केट, हेजिंग और ग्रामीण रोजगार 

एनसीडीईएक्स (NCDEX) के एमडी और सीईओ डॉ. अरुण रस्ते का मानना है कि इस बजट में खेती को ज्यादा मजबूत और बाजार को ज्यादा कारगर बनाने पर ध्यान देना चाहिए. उनका कहना है कि एग्रीकल्चरल रिसर्च में ज्यादा पैसा लगाना जरूरी है, खासकर ऐसे बीजों के लिए जो पैदावार बढ़ाने में मदद करने के साथ ही साथ क्लाइमेट में होने वाले बदलावों को बेहतर ढंग से झेल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स को रैशनलाइज करने और कमोडिटी डेरिवेटिव्स पर GST के बारे में स्पष्टता आने से किसानों और एफपीओ (FPO) को प्राइस रिस्क से बचाव में मदद मिलेगी।

डॉ. अरुण के मुताबिक अगर बैंकों, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स की भागीदारी बढ़ाई जाए और एग्री क्रेडिट और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को हेजिंग से जोड़ा जाए, तो इससे कृषि उत्पादों के बाजार को मजबूत बनाने में काफी मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उनका मानना है कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और वेयरहाउसिंग में निवेश बढ़ाना भी जरूरी है, जिससे गांवों में रोजगार में इजाफा होगा।

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इनपुट लागत घटाने के लिए क्या होगा 

किसानों पर बढ़ती लागत का दबाव भी बजट की बड़ी थीम बन सकता है। इसी लिहाज से कीटनाशकों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग भी उठ रही है। ठीक वैसे ही जैसे जरूरी दवाओं पर कम टैक्स लगता है। इसके साथ ही फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर में डिजिटाइजेशन, डीक्रिमिनलाइजेशन और डी-रेगुलेशन जैसे सुधारों की भी उम्मीद इस बजट से की जा रही है। सरकार से यह भी अपेक्षा है कि न्यूट्रिएंट-रिच और रेजिड्यू-फ्री खेती को राष्ट्रीय कृषि और स्वास्थ्य नीति से जोड़ा जाए।

इंफ्रास्ट्रक्चर और फिजिटल मॉडल पर नजर

बजट 2026 में एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर, वैज्ञानिक वेयरहाउसिंग और पोस्ट-हार्वेस्ट लॉजिस्टिक्स पर निवेश बढ़ाए जाने की भी संभावना है। इससे फसल की बर्बादी कम होगी और किसानों की आमदनी सुधरेगी। साथ ही, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने वाला ‘फिजिटल’ मॉडल भी लागू होना चाहिए, जिससे एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स की ट्रेसेबिलिटी, क्वालिटी असेसमेंट, कमोडिटी फाइनेंसिंग और रिस्क मैनेजमेंट को मजबूती मिलेगी। पूरी एग्री वैल्यू चेन को मजबूत करने वाला बजट ही भारत की खेती को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिकने लायक बना सकता है।