विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने बजट सत्र बुलाने का एलान कर दिया है। बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी से होगी और एक फरवरी को सरकार आम बजट पेश करेगी। इसके साथ ही रेल बजट भी पेश किया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस बारे में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इसमें संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के संबोधन के कार्यक्रम का भी उल्लेख है। बताते चलें कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्ष ने केंद्रीय बजट की तिथि मतदान खत्म होने के बाद रखने की मांग की थी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बसपा और सपा समेत विपक्षी दलों की च्ट्ठिी के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को चिट्ठी लिख कर उनसे विपक्ष की आपत्तियों के बारे में 10 जनवरी तक जवाब देने को कहा है। सरकार ने अभी आयोग को जवाब नहीं भेजा है।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ने बजट सत्र 31 जनवरी से बुलाने की सिफारिश की थी ताकि नए वित्त वर्ष में नए प्रावधानों को एक अप्रैल से अमल में लाया जा सके। एक फरवरी को आम बजट और रेल बजट के साथ ही आर्थिक सर्वे भी संसद में रखा जाएगा। राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति
प्रणब मुखर्जी ने सत्र 31 जनवरी से बुलाया है, जो 12 अप्रैल तक चलेगा। बजट सत्र को लेकर सरकार का रख बिल्कुल स्पष्ट है। नियमों व प्रक्रिया के मुताबिक केंद्रीय बजट को राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान पेश करने को लेकर कोई वैधानिक समस्या नहीं है। समय से पूर्व बजट सत्र बुलाने में भी कोई संवैधानिक बाधा नहीं है। आम तौर पर बजट सत्र का आयोजन फरवरी के तीसरे हफ्ते में किया जाता है।

मौजूदा वित्त वर्ष का अंत 500-1000 रुपए के नोटों को अमान्य करने के केंद्र सरकार के फैसले के असर के साए में हो रहा है। साल 2016 का अंत सरकार के दो प्रमुख आर्थिक फैसलों के साथ हुआ है, जिसका असर बजट पर दिखेगा। पहला है, गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) और दूसरा नोटबंदी। बजट 2017 दो बड़े बदलावों का गवाह रहेगा। पहला, रेल बजट अब आम बजट में ही पेश किया जाएगा। दूसरे, इस बार फरवरी के आखिरी हफ्ते में नहीं, बल्कि पहले हफ्ते में बजट सत्र शुरू होगा।
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बजट 2017 से उम्मीदें
टैक्स की दरों में कमी का अनुमान लगाया जा रहा है। मौजूदा दर 2.5 लाख रुपए से ज्यादा की आय पर 10 फीसद है। पांच लाख से ज्यादा की आय पर 20 फीसद और 10 लाख रुपए से अधिक पर 30 फीसद है। नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित गरीबों को लुभाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा के आसार हैं। जनकल्याण योजनाओं के व्यय में उछाल देखा जा सकता है। नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाली मोदी सरकार ई-पेमेंट के लिए टैक्स में छूट की घोषणा भी कर सकती है।
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विपक्ष की आपत्ति
कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि बजट में की जाने वाली घोषणाओं से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी चुनावी फायदा उठा सकती है। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को इस संबंध में पत्र लिखा था और चुनाव आयोग को भी ज्ञापन सौंपा था। इसके मद्देनजर आयोग ने सरकार से जवाब मांगा है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के अनुसार, वर्ष 2012 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों की आपत्ति के बाद कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 28 फरवरी के बजाय 16 मार्च को पेश किया था। इस बार भी ऐसा करना चाहिए। एक फरवरी को बजट लाकर घोषणाओं का इस्तेमाल मतदाताओं को लुभाने के लिए किया जा सकता है।
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जेटली और नायडू के तर्क
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार, नोटबंदी को लेकर जनसमर्थन देखकर विपक्ष अभी से ही डरा हुआ है। इसलिए विरोध हो रहा है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि बजट को लेकर विपक्ष की मांग जनविरोधी है। केंद्र का बजट देश के लिए होता है, न कि खास तौर पर राज्यों के लिए।