Budget 2026 and Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की वजह से पिछला एक साल सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियों से भरा रहा है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर असमंजस और अस्थिरता में इजाफा हुआ है. घरेलू मोर्चे पर मजबूती के बावजूद इन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का असर भारत पर भी पड़ा है. ऐसे माहौल में उम्मीद की जा रही है कि बजट 2026 में सरकार टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस और व्यावहारिक रास्ता पेश करेगी. 

सरकार के सामने बड़ी चुनौती ये है कि मौजूदा माहौल में भारत ग्लोबल ट्रेड में अपनी मजबूती हिस्सेदारी कैसे बनाए रखे, वह भी घरेलू उद्योगों को जरूरी प्रोटेक्शन जारी रखने के साथ. इस संतुलन को साधने के लिए बजट में पॉलिसी के स्तर पर कई अहम कदम उठाए जा सकते हैं.

इंपोर्ट ड्यूटी का रैशनलाइजेशन 

बीते कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि कई मामलों में कच्चे माल पर लगने वाला टैक्स तैयार माल से ज्यादा होता है. इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग महंगी हो जाती है. बजट 2026 में सरकार ऐसी विसंगतियों को दूर करने की कोशिश कर सकती है. इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर के लिए जरूरी कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का रास्ता अपनाया जा सकता है, ताकि देश में बनने वाले प्रोडक्ट्स की लागत कम हो.

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टैरिफ से प्रभावित एक्सपोर्ट सेक्टर को राहत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ का असर भारत के एक्सपोर्ट पर पड़ रहा है. इसे देखते हुए सरकार एक्सपोर्ट से जुड़ी स्कीम्स को और मजबूत कर सकती है. इसके लिए एक्सपोर्ट से जुड़े इंसेंटिव, सस्ती ब्याज दर पर लोन मुहैया कराने और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स के लिए फंड एलोकेशन बढ़ाने जैसे उपाय किए जा सकते हैं. खासतौर पर टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वैलरी और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स को प्राथमिकता दी जा सकती है, जहां एक्सपोर्ट की संभावनाओं के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार भी जुड़ा है.

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का बेहतर इस्तेमाल

भारत का कई देशों और उनके ग्रुप्स के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पहले से है और ऐसे समझौतों को आगे भी बढ़ावा दिया जा रहा है. लेकिन कई बार कंपनियां इनका पूरा फायदा नहीं उठा पातीं. बजट 2026 में सरकार एक्सपोर्टर्स को इन समझौतों का फायदा उठाने में मदद के लिए उपायों की घोषणा कर सकती है. इसके तहत एक्सपोर्टर्स को नियमों की जानकारी देने, कागजी प्रक्रिया को आसान बनाने और ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ जैसी शर्तों को पूरा करने में मदद देने जैसी पहलकदमियां की जा सकती हैं.

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लागत कम करने वाले उपाय

कई बार टैरिफ के साथ-साथ ऊंची लॉजिस्टिक्स लागत भी कारोबारियों की परेशानी बढ़ा देती है. बजट में कस्टम्स क्लियरेंस को तेज करने, डिजिटल डॉक्युमेंटेशन और पोर्ट व वेयरहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर फोकस हो सकता है. इससे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट की कुल लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.

नए बाजारों की तलाश को बढ़ावा

कुछ चुनिंदा देशों पर ज्यादा निर्भरता भी टैरिफ जोखिम बढ़ाती है. Budget 2026 में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और वेस्ट एशिया जैसे नए बाजारों में भारतीय सामान की पहुंच बढ़ाने के लिए सपोर्ट मिल सकता है. छोटे निर्यातकों के लिए फाइनेंस और इंश्योरेंस आसान किया जा सकता है.

टैरिफ का संतुलित इस्तेमाल

सरकार यह संकेत भी दे सकती है कि टैरिफ का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाएगा. जिससे उभरते सेक्टर्स को सुरक्षा मिलेगी, लेकिन कंज्यूमर्स और एक्सपोर्टर्स पर गैर-जरूरी बोझ नहीं पड़ेगा. स्टेबल और स्पष्ट टैरिफ पॉलिसी से कारोबारियों का भरोसा भी बढे़गा.

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अंतरराष्ट्रीय निर्भरता कम करने की कोशिश

इन तमाम उपायों के साथ ही साथ सरकार इस बजट में घरेलू अर्थव्यवस्था की अंतरराष्ट्रीय निर्भरता कम करने के लिए भी उपाय कर सकती है. क्योंकि टैरिफ की मार से बचने का सबसे स्थायी तरीका यही है. इस लिहाज से Budget 2026 में मेक इन इंडिया (Make in India) और आत्मनिर्भर भारत जैसी पॉलिसी को आगे बढ़ाने के लिए नए ऐलान हो सकते हैं. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर टैक्स में राहत, MSME को आसान कर्ज और कैपेक्स बढ़ाने जैसे कदम घरेलू उद्योगों को मजबूत कर सकते हैं और इंपोर्ट पर निर्भरता घटा सकते हैं.

इसके साथ ही डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (Production Linked Incentive) यानी पीएलआई (PLI) जैसी योजनाओं को और मजबूत करना, टैरिफ के असर को कम करने के लिए इंपोर्ट सब्सटीट्यूशन (Import Substitution) और महत्वपूर्ण सेक्टर्स में एफडीआई को बढ़ावा देने के लिए ऑटोमैटिक रूट खोलने जैसे कदम भी शामिल हैं. इसके साथ ही सरकार घरेलू डिमांड और कंजम्प्शन को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठा सकती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियां आने के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट मजबूत बनी रहे.

कुल मिलाकर बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि इसमें टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों को सिर्फ तात्कालिक नजरिए से नहीं, बल्कि लंबी अवधि की रणनीति के साथ देखा जाएगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया भर में अपनी साख और हैसियत को आगे आगे बढ़ाने में सफल होगी.