रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले दो साल में लैंडिंग रेट (उधार ब्याज दर) कम करके 175 बेसिस प्वाइंट पर लेकर आ गया है, जिससे बैंक एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर कम हो गई है। इसका उदाहरण है, देश के सबसे बड़े लेंडर (ऋणदाता) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एक साल के फिक्सड डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दर को घटाकर 135 बेसिस प्वाइंट तक ले आया है। ब्याज दरों के गिरने और इनकम टैक्स फैक्टर को ध्यान में रखते हुए निवेशकों का रुझान फिक्सड डिपॉजिट (FD) की ओर कम हो रहा है। खासकर ऐसे निवेशकों का जो कि हाई टैक्स ब्रैकेट में आते हैं। इससे टैक्स फ्री बॉन्ड की मांग बढ़ रही है। टैक्स फ्री बॉन्ड सरकार के स्वामित्व वाली संस्थाओं द्वारा पिछले कुछ सालों से जारी किया जा रहा है। ये बॉन्ड ऐसे निवेशकों में खासे लोकप्रिय हो रहे हैं जो कि स्थिर कर मुक्त ब्याज आय चाहते हैं लेकिन इस फिस्कल ईयर में टैक्स फ्री बॉन्ड के नहीं जारी किए गए हैं। जब से टैक्स फ्री बॉन्ड्स का कारोबार स्टॉक एक्सचेंज के जरिए हो रहा है, जिससे निवेशक इसको सेकेंडरी मार्केट्स से खरीद सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा आगे चलकर उधारी दर में कटौती की उम्मीदों के बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेकेंडरी मार्केट के जरिए लोग निवेश का कुछ हिस्सा टैक्स फ्री बॉन्ड में लगा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर देंखे तो एनएचएआई के टैक्स फ्री बॉन्ड प र7.69 पर्सेंट का रिटर्न, आईआरएफसी बॉन्ड्स पर 7.64 पर्सेंट और नाबार्ड बॉन्ड पर 7.64 पर्सेंट रिटर्न मिल रहा है। ये बॉन्ड इस साल की शुरूआत में जारी किए गए थे। एक्सपर्ट का मानना है कि हाई टैक्स ब्रैकेट वालों के लिए टैक्स फ्री बॉन्ड एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
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क्या होते हैं टैक्स फ्री बॉण्ड
टैक्स फ्री बॉण्ड एक फिक्स इनकम प्रोडक्ट है। सामान्यतया यह बाण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़ी आईआरएफसी, पीएफसी, एनएचएआई, हुडको, आरईसी, एनटीपीसी और इंडियन रिन्युएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी जैसी सरकारी कंपनियां पेश करती हैं। यह बाण्ड एक निश्चित समय अवधि जैसे 10, 15 अथवा 20 साल के लिए जारी किए जाते हैं। इन पर ब्याज भी निश्चित होता है। टैक्स फ्री बॉण्ड सामान्य बॉन्ड से अलग होता है क्योंकि इस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है। ऐसे में आप जिस भी इनकम ग्रेड में आते हों, आपको इसके रिटर्न पर टैक्स नहीं देना होता है।
