8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग के गठन के समय से ही फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा है। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से लेकर अर्थशास्त्रियों व मार्केट विश्लेषकों तक- हर कोई एक बात पर सहमत है। और वो है कि सैलरी और पेंशन में सबसे बड़ा बदलाव कमीशन द्वारा सिफारिश किए जाने वाले फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ही होगा।
पिछले कुछ मीनों के दौरान अलग-अलग अनुमान लगाए गए हैं। ब्रोकरेज की रिपोर्ट्स, पूर्व नीति निर्माताओं और कर्मचारी संघों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की बात कही है। और यही वजह है कि सैलरी व पेंशन में बदलाव को लेकर अनुमान भी अलग-अलग हैं।
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क्या है फिटमेंट फैक्टर और क्यों है यह अहम?
आसान शब्दों में कहें तो फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर है जिसे मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को रिवाइज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक बार कमीशन द्वारा इस फैक्टर को फाइनल कर दिया जाता है तो अलग-अलग पे लेवल की नई बेसिक सैलरी और पेंशन के लिए इसे लागू किया जाता है।
उदाहरण के लिए एक लेवल-1 केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है।
-फिटमेंट फैक्टर 2.0 होने पर यह बढ़कर ₹36,000 हो जाएगा।
-फिटमेंट फैक्टर 3.0 होने पर न्यूनतम मूल वेतन ₹54,000 तक पहुंच जाएगा।
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7th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर
-7वें वेतन आयोग में इस्तेमाल किए गए 2.57 फिटमेंट फैक्टर ने न्यूनतम वेतन को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया था।
-इसी कारण फिटमेंट फैक्टर में छोटी सी भी बढ़ोतरी कर्मचारियों के टेक-होम सैलरी, पेंशन, डीए कैलकुलेशन और भविष्य की वेतन बढ़ोत्तरी पर बड़ा असर डालती है।
विशेषज्ञ और रिपोर्टों की राय:
बाजार आधारित अनुमान आम तौर पर सतर्क रहे हैं। Kotak Institutional Equities ने फिटमेंट फैक्टर को लगभग 1.8 आंका है। Ambit Capital ने कुल वेतन वृद्धि को 30–34% अनुमानित किया है जो फिटमेंट फैक्टर के 1.8 से 2.46 के दायरे में आता है।
हालांकि, कई कर्मचारी अभी भी 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर को आधार मानकर उम्मीदें रखते हैं। उनका मानना है कि मुद्रास्फीति और जीवनयापन की लागत को देखते हुए 8वें आयोग से समान या थोड़ा अधिक फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश हो सकती है।
इस बहस में वास्तविकता की बात जोड़ते हुए पूर्व वित्त सचिव एस.सी. गर्ग ने कहा कि 1.92 से 2.08 के बीच फिटमेंट फैक्टर ज्यादा प्रैक्टिकलल लगता है। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि 2.86 या इससे ज्यादा जैसे प्रस्तावों से सरकार पर वित्तीय दबाव डाल सकते हैं और यह ‘चांद मांगने जैसा है।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि फाइनल कॉल कमीशन द्वारा किए जाने वाले विश्लेषण और फिस्कल स्पेस पर निर्भर करेगा।
FNPO ने की 3.25 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग
बहस और तेज हो गई जब नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन फेडरेशन (FNPO) ने नेशनल काउंसिल (JCM, स्टाफ साइड) को पत्र लिखा जिसमें ग्रुप A, B, C और D के डाक कर्मचारियों के लिए 3.0 से 3.25 तक बहु-स्तरीय फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया गया।
FNPO के अनुसार, ऐसी संरचना समान वेतन संशोधन सुनिश्चित करने, अलग-अलग लेवल के बीच सापेक्षता बनाए रखने और लंबे समय से लंबित वेतन स्थिरता की समस्याओं को हल करने के लिए जरूरी है। कर्मचारी संगठन ने 5% वार्षिक वेतन वृद्धि, ज्यादा भत्ते और पे मैट्रिक्स सिस्टम में बदलाव की भी मांग की है।
रिपोर्ट के अनुसार, FNPO के महासचिव सिवाजी वासिरेड्डी ने संकेत दिया कि नेशनल काउंसिल (JCM) फरवरी के आखिर में ड्राफ्ट कमेटी से मिलने की उम्मीद है। जिसके बाद फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन और भत्तों सहित समेकित सिफारिशें 8वें वेतन आयोग के अध्यक्ष को भेजी जाएंगी।
फिटमेंट फैक्टर क्या है?
फिटमेंट फैक्टर एक गुणांक है, जिसे मौजूदा बेसिक पे से गुणा किया जाता है। इसी के आधार पर नया बेसिक पे तय होता है। अगर हम 7वें वेतन आयोग की बात करें तो इसमें फिटमेंट फैक्टर 2.57 था जिससे न्यूनतम सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई। लेकिन क्या इससे पूरी सैलरी 2.57 गुना बढ़ गई? नहीं! दरअसल, उस समय कुल सैलरी में औसतन सिर्फ 14.3% की ग्रोथ हुई थी।
