सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भारतीय वाहनों के लिए सुरक्षा रेटिंग प्रणाली में बड़े बदलाव करते हुए AIS-197 (Revision 1) के तहत भारत NCAP 2.0 का ड्राफ्ट जारी किया है। यह नया फ्रेमवर्क अब केवल क्रैश प्रोटेक्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वाहन सुरक्षा को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ते हुए पांच अलग-अलग पैरामीटर पर रेटिंग देगा। नया नियम अक्टूबर 2027 से लागू होने की योजना है।

क्या बदलेगा Bharat NCAP 2.0 में?

15 से अधिक टेस्ट और 5-पिलर सुरक्षा रेटिंग, जिसमें नई रेटिंग प्रणाली को 100 अंकों में बांटा गया है, जिसे पांच सुरक्षा पिलर में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं।

अब तक रेटिंग केवल एडल्ट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन और कुछ बेसिक फीचर्स पर आधारित थी, लेकिन नए सिस्टम में सड़क पर वास्तविक हादसों की स्थितियां भी शामिल की गई हैं।

इन फीचर्स के बिना सेफ्टी रेटिंग नहीं मिलेगी

इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) अनिवार्य

कर्टन एयरबैग अनिवार्य

साइड-फेसिंग सीट वाले वाहन को कोई स्टार रेटिंग नहीं मिलेगी

AEB (ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग) अभी विकल्प के रूप में रहेगी

क्या है नई Crash Test प्रक्रिया ?

भारत NCAP 2.0 के तहत वाहनों को पांच नए क्रैश टेस्ट पास करने होंगे और ये सभी टेस्ट मॉडल के बेस वेरिएंट पर किए जाएंगे।

64 km/h ऑफसेट फ्रंटल क्रैश

50 km/h फुल-विड्थ फ्रंटल टेस्ट

50 km/h मोबाइल लेटरल बैरियर टेस्ट

32 km/h पोल साइड इंपैक्ट टेस्ट

50 km/h पीछे से मोबाइल रिगिड इंपैक्ट टेस्ट

फुल-विड्थ फ्रंटल और रियर इंपैक्ट जैसी नई टेस्ट स्थितियां वास्तविक दुर्घटना परिदृश्यों को बेहतर तरीके से दर्शाती हैं।

स्टार रेटिंग के नए मानक

2027–2029: 5-स्टार रेटिंग के लिए कम से कम 70 अंक

2029–2031: 5-स्टार रेटिंग के लिए कम से कम 80 अंक

हर कैटेगरी में न्यूनतम स्कोर भी अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी फीचर को नजरअंदाज न किया जा सके।

कब से लागू होगा Bharat NCAP 2.0?

मौजूदा नियम 20 सितंबर 2027 को समाप्त होंगे और  नई NCAP प्रणाली अक्टूबर 2027 से लागू हो जाएगी। फिलहाल ड्राफ्ट सुझावों और सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खुला है।

खरीदारों और कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?

कार खरीदने वालों को ज्यादा स्पष्ट और वास्तविक सुरक्षा रेटिंग मिलेगी और कंपनियों के लिए एडवांस एक्टिव व पैसिव सुरक्षा तकनीकें देने की बाध्यता बढ़ेगी और 5-स्टार रेटिंग के लिए पहले से ज्यादा सख्त मापदंड लागू होंगे।