वजन घटाने या मेनटेन करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग करने का एक ट्रेंड शुरू हो गया है। हालांकि, यह कुछ लोगों के लिए वेट मैनेजमेंट का सही अप्रोच नहीं है। आइये जानें यह किनके लिए खतरनाक हो सकता है।
रिसर्च से पता चलता है कि खाने के बीच आठ घंटे का गैप रखने से हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग ब्लड शुगर के लेवल को प्रभावित कर सकता है, जो मधुमेह या हाइपोग्लाइसीमिया से ग्रस्त लोगों के लिए चिंता का विषय है।
गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मां और बच्चे दोनों के लिए पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। इन महत्वपूर्ण अवधियों के दौरान इंटरमिटेंट फास्टिंग जरूरी न्यू्ट्रिएंट और एनर्जी प्रदान नहीं कर सकता है।
जिन लोगों को एनोरेक्सिया, बुलिमिया या अत्यधिक भोजन जैसे भोजन विकारों का इतिहास रहा है, उनके लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग भोजन के साथ उनके अस्वास्थ्यकर संबंधों को और बिगाड़ सकता है।
ग्रोथ के दौरान बच्चों और किशोरों की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। रुक-रुक कर उपवास करने से इन जरूरतों में बाधा आ सकती है, जिससे ग्रोथ और डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है।
अगर किसी व्यक्ति में पहले से ही पोषण संबंधी कमियां हैं, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग जरूरी पोषक तत्वों के सेवन को सीमित करके उसकी स्थिति को और बिगाड़ सकता है।