May 30, 2025
40 की उम्र के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। मसल्स मास कम होने लगता है, जोड़ों में जकड़न बढ़ जाती है और मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। ऐसे में अगर आप खुद को फिट, एक्टिव और जवान बनाए रखना चाहते हैं, तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा जरूर बनाएं।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न सिर्फ मसल्स को मजबूत बनाती है, बल्कि हड्डियों की मजबूती, बैलेंस, पॉश्चर और एनर्जी लेवल को भी सुधारती है। यहां हम आपको बता रहे हैं 40 की उम्र के बाद अपनाने योग्य 7 जरूरी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज, जो आपकी सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचा सकती हैं।
इस एक्सरसाइज में एक डम्बल या केटलबेल को छाती के पास पकड़कर स्क्वैट करते हैं। (फायदे: यह पैरों, ग्लूट्स और कोर मसल्स को मजबूत बनाती है और घुटनों की सेहत में सुधार करती है।)
डेडलिफ्ट एक पावरफुल मूवमेंट है जिसमें कमर झुका कर वजन उठाया जाता है। (फायदे: यह हैमस्ट्रिंग, ग्लूट्स और लोअर बैक को टारगेट करती है, जिससे पीठ की ताकत और स्थिरता बढ़ती है।)
बॉडीवेट से की जाने वाली ये एक्सरसाइज ऊपरी शरीर की ताकत बढ़ाने में मदद करती है। (फायदे: छाती, कंधे, ट्राइसेप्स और कोर मसल्स को टोन करने में मदद करती है।)
इसमें एक प्लेटफॉर्म या स्टेप बॉक्स पर एक-एक पैर से चढ़ना होता है। (फायदे: यह बैलेंस, लेग स्ट्रेंथ और फंक्शनल मूवमेंट को बेहतर करती है, जिससे रोजमर्रा के काम आसान हो जाते हैं।)
प्लैंक एक स्टैटिक एक्सरसाइज है जिसमें शरीर को सीधा रखते हुए फोरआर्म्स पर बैलेंस किया जाता है। (फायदे: कोर स्ट्रेंथ बढ़ती है, रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट मिलता है और पॉश्चर सुधरता है।)
इसमें डम्बल को शरीर की ओर खींचा जाता है जिससे अपर बैक मसल्स पर काम होता है। (फायदे: पीठ और कंधों को मजबूत बनाती है और झुकाव या झुकी हुई मुद्रा को सुधारने में मदद करती है।)
फॉरवर्ड या वॉकिंग लंजेस करने से पैरों की ताकत बढ़ती है। (फायदे: क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और ग्लूट्स को एक्टिवेट कर लोअर बॉडी को मजबूत करती है।)
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