विकास दिव्यकीर्ति भारत में सिविल सेवा की तैयारी करने वाले मशहूर शिक्षकों में से एक हैं।
दृष्टि आईएएस कोचिंग के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति एक मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं।
विकास दिव्यकीर्ति ने बताया कि अगर व्यक्ति कुछ आदतें डाल ले तो आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।
विकास दिव्यकीर्ति के अनुसार, अपनी भावनाओं पर इतना कंट्रोल करना जानते हों कि आपको यह क्लियर रहे कि इनमें बहना नहीं है। हर परिस्थिति में सिर्फ अपने उद्देश्य को ध्यान में रखना है।
विकास दिव्यकीर्ति कहते हैं कि, लोक जीवन में हैं निंदा होती रहती है। आलोचनाएं होती रहती हैं। इन्हें झेलनी पड़ेगी और आदत डालनी होगी।
इसके आगे वो तुलसीदास जी का दोहा पढ़ते हैं 'हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस विधि हाथ'।
यानी हानि होगा या लाभ, जिएंगे या मरेंगे, यश होगा या अपयश होगा ये नियति के हाथ में है मेरे हाथ में नहीं है।
अपयश हो रहा है तो हो रहा है कभी यश भी हो जाएगा। पर ये कहना बड़ा आसान है लेकिन जीना बहुत मुश्किल है।
विकास दिव्यकीर्ति कहते हैं कि, जब अपयश होता है तो ऐसी बातें याद नहीं आते। उस वक्त दिल की धड़कने बढ़ जाती हैं। बीपी बढ़ने लगता है। बेचैनी होती है। एंग्जाइटी होती है, नींद नहीं आती है।
लेकिन अगर इसे आदत बना लिए और झेलना सीख गए तो सफल होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।