भारत में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ी आदत है। सुबह की नींद तोड़ने से लेकर थकान मिटाने तक, एक कप चाय हमारे दिन का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन जब हेल्थ की बात आती है, तो सबसे पहले निशाने पर आती है — चीनी।
अधिक चीनी का सेवन डायबिटीज, मोटापा और हार्ट डिज़ीज़ जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम अपनी चाय से चीनी को अलविदा कहें। लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि अब चाय फीकी ही रहेगी?
बिल्कुल नहीं! आइए जानते हैं कुछ हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प, जो बिना चीनी के भी आपकी चाय को मीठा बना सकते हैं।
स्टीविया एक हर्बल स्वीटनर है जो चीनी से 200–300 गुना ज्यादा मीठा होता है, लेकिन इसमें कोई कैलोरी नहीं होती। यह डायबिटीज मरीजों के लिए भी सुरक्षित है। इसे पत्तों, पाउडर या ड्रॉप्स के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सिर्फ थोड़ी-सी मात्रा में ही यह चाय को काफी मीठा बना देता है।
मिश्री का इस्तेमाल चाय में एक ट्रेडिशनल ऑप्शन रहा है। यह रिफाइंड नहीं होती और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है। मिश्री न सिर्फ मिठास देती है बल्कि पाचन में भी मदद करती है। हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
गुड़ वाली चाय न सिर्फ मीठी होती है बल्कि आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर भी होती है। यह शरीर को डिटॉक्स करने और एनर्जी देने में सहायक होता है। लेकिन ध्यान दें, गुड़ में भी कैलोरी होती है, इसलिए इसका भी सीमित उपयोग करें।
खजूर नेचुरल मिठास से भरपूर होता है। इसका सिरप या पाउडर चाय में अच्छा फ्लेवर देने के साथ ही हेल्दी भी होता है। यह खासतौर पर सर्दियों में शरीर को ताकत देता है।
कोकोनट शुगर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता। इसका टेस्ट थोड़ा कारमेल जैसा होता है जो चाय को एक रिच फ्लेवर देता है।
शहद का स्वाद और मिठास दोनों ही बेमिसाल हैं। लेकिन इसे कभी भी गर्म चाय में न मिलाएं, क्योंकि अधिक तापमान इसके पोषक तत्वों को नष्ट कर देता है। हल्की ठंडी चाय में डालें।
कुछ लोग चाय में सेब, अनार या खजूर जैसे फलों का अर्क या थोड़ा सा जूस मिलाते हैं। इससे चाय को हल्का फ्रूटी फ्लेवर मिलता है और मिठास भी बढ़ जाती है।
किसी भी विकल्प का प्रयोग सीमित मात्रा में करें। अगर आप डायबिटीज या किसी अन्य हेल्थ कंडीशन से जूझ रहे हैं, तो कोई भी स्वीटनर डॉक्टर की सलाह लेकर ही अपनाएं। स्वाद को धीरे-धीरे एडजस्ट करें, वक्त के साथ जीभ खुद को ढाल लेती है।