May 05, 2025
भारतवर्ष में गंगा नदी को केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि माँ गंगा के रूप में पूजा जाता है। गंगा में सिक्का डालना एक आम धार्मिक परंपरा बन चुकी है, जिसे लोग पुण्य और शुभता से जोड़कर देखते हैं।
माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में समृद्धि आती है। लेकिन क्या सच में गंगा में सिक्के डालना पुण्य है? या यह सिर्फ एक परंपरा भर है?
हाल ही में एक श्रद्धालु ने इसी प्रश्न को लेकर प्रख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज से मार्गदर्शन मांगा। सोशल मीडिया के माध्यम से लाखों लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले प्रेमानंद जी महाराज ने इस सवाल का जवाब बहुत सहज, तार्किक और सारगर्भित तरीके से दिया।
प्रेमानंद जी महाराज ने स्पष्ट किया कि गंगा में सिक्के डालना न तो किसी धार्मिक शास्त्र में पुण्य कार्य बताया गया है और न ही यह कोई सच्ची परंपरा है।
इसके विपरीत, यह कार्य गंगा की पवित्रता और स्वच्छता को नुकसान पहुंचाता है। सिक्के नदी के तल में जमा होकर जल को प्रदूषित करते हैं और जीव-जंतुओं के लिए भी हानिकारक सिद्ध होते हैं।
महाराज जी ने समझाया कि सच्चा पुण्य गंगा में सिक्का डालने से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा करने से प्राप्त होता है।
जैसे—भूखों को भोजन कराना, निर्धनों की सहायता करना, असहाय जानवरों की देखभाल करना आदि। यही कार्य वास्तविक धर्म और सच्चे पुण्य के प्रतीक हैं।
प्रेमानंद जी महाराज ने लोगों से आग्रह किया कि वे अंधविश्वासों से ऊपर उठें और अपनी श्रद्धा को सही दिशा दें। प्रेमानंद जी के अनुसार, गंगा को पवित्र मानने का मतलब है कि उसकी स्वच्छता और संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमें लेनी चाहिए। सिक्के डालने से न तो पुण्य प्राप्त होता है, न कोई वरदान मिलता है—बल्कि यह एक प्रदूषण फैलाने वाला कृत्य है।
कमजोर बालों को मजबूत बनाएंगे ये 7 हेयर केयर रूटीन