May 16, 2025
प्रतिदिन कुछ समय मौन बैठकर अपने श्वास या मंत्र पर ध्यान केंद्रित करें।
संगत बदलने से जीवन बदल जाता है। संतों और सकारात्मक लोगों की संगति करें। यह आपके विचारों और व्यवहारों में मधुरता लाती है।
आध्यात्मिकता की राह पर चलने के लिए एक गुरु की संगत जरूरी है। अपने आप को सच्चे गुरु के चरणों में समर्पण करें। गुरु की सेवा और उपदेशों का पालन आत्मिक उत्थान लाता है।
प्रतिदिन ईश्वर के नाम का जप करें। ऐसा करने से चित्त शुद्ध होता है।
दूसरों को क्षमा करना खुद को मुक्त करना है। अपने भीतर की घृणा, क्रोध और ईर्ष्या को त्यागें। सच्चा धर्म प्रेम है।
सच्चा योग निस्वार्थ सेवा है। जरूरतमंदों, भूखों, असहायों की सेवा करना। इंसान के ये गुण उसके अहंकार को मारता है और हृदय में सबके लिए प्रेम भाव प्रकट करता है।
आपका शरीर ही मंदिर है। ऐसे में आध्यात्म की राह पर चल रहे है तो सात्विक भोजन और संयमित जीवन शैली अपनानें। क्योंकि, शुद्ध शरीर में ही शुद्ध चित्त का वास होता है।
पूरे दिन काम करने के बाद अंत में यह देखें कि आपने क्या सही किया और क्या सुधारना है। यह आत्म-विकास का दर्पण है।
भगवद गीता, उपनिषद, रामायण, संत वाणी जैसे ग्रंथ पढ़ना चाहिए। ये आत्मा को सही दिशा देते हैं।
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