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तो इस वजह से शादी के दिन घोड़ी पर बैठकर अपनी दुल्हन लेने जाते हैं लड़के

विवाह के मौके पर दूल्हे हमेशा घोड़ी पर ही क्यों बैठते हैं?? क्या ये सवाल आपके मन में भी आता है। लड़के हो चाहे लड़कियां सभी इस बात को बखूबी जानते हैं कि शादी के अवसर पर दूल्हा घोड़ी चढ़कर ही अपनी दुल्हन लेने आता है। लड़कियां बचपन से ही अपने सपने के राजकुमार की […]

Author July 26, 2017 9:27 PM

विवाह के मौके पर दूल्हे हमेशा घोड़ी पर ही क्यों बैठते हैं?? क्या ये सवाल आपके मन में भी आता है। लड़के हो चाहे लड़कियां सभी इस बात को बखूबी जानते हैं कि शादी के अवसर पर दूल्हा घोड़ी चढ़कर ही अपनी दुल्हन लेने आता है। लड़कियां बचपन से ही अपने सपने के राजकुमार की कल्पना करती हैं। उनका राजकुमार हमेशा घोड़ी पर ही होता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर शादी करने के लिए लड़के घोड़े पर ही क्यों आते हैं।

दरअसल, हमारे भगवान कृष्ण रुक्मणी का विवाह हो या राम सीता का। उस समय की परिस्थितियां युद्ध जैसी थी। यही वजह थी कि वह अपनी पत्नी को लाने घोड़ी पर जाया करते थे। यही से घोड़ी पर दुल्हन लाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

घोड़े को वीरता और शौर्य का प्रतीक माना जाता है तो वहीं घोड़ी को उत्पत्ति का कारक करार दिया गया है। घोड़ी बुद्धिमान, चतुर और दक्ष होती है। भारत में विवाह एक उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं, यहां दुल्हे को राजा सा सम्मान दिया जाता हैं। विवाह के समय लड़के मस्तक पर फूलों का सेहरा बांधकर घोड़ी पर चढ़ता है। इतना ही नहीं उसके हाथ में एक तलवार भी दिया जाता है।

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