वीडियो: बाइक से उतरने को राजी नहीं बंदर, चप्पल मारने पर किया ये हाल

बाइक मालिक ने आव देखा न ताव और दूर से ही एक चप्पल फेंककर बंदर को मारी। इसके बाद वो हुआ जो शायद बाइक मालिक ने कभी नहीं सोचा होगा। बंदर और बाइक वाले के बीच में ऐसी जंग छिड़ गई कि जैसे दोनों रेसलिंग के रिंग में हों और पुरस्कार पाने के लिए फाइट कर रहे हों!

बाइक से उतरने को राजी नहीं बंदर। (Screengrab: Youtube/ViralHog)

सर्कस के खेल, पेड़ की डाल या छत के छज्जे से इतर एक बंदर को स्पोर्ट्स बाइक पसंद आ गई। बंदर उससे उतरने को राजी नहीं हुआ। बाइक वाले ने आवाज देकर उसे बाइक से उतारने की हर संभव कोशिश की लेकिन बंदर बाइक की सीट छोड़ने को राजी नहीं हुआ। बाइक मालिक ने आव देखा न ताव और दूर से ही एक चप्पल फेंककर बंदर को मारी। इसके बाद वो हुआ जो शायद बाइक मालिक ने कभी नहीं सोचा होगा। बंदर और बाइक वाले के बीच में ऐसी जंग छिड़ गई कि जैसे दोनों रेसलिंग के रिंग में हों और पुरस्कार पाने के लिए फाइट कर रहे हों! इस खेल में जीत किसकी हुई यह नहीं पता लेकिन यूट्यूब पर पड़ा यह पुराना वीडियो लोगों का खासा ध्यान खींच रहा है। खबर लिखे जाने तक इसे करीब साढ़े 26 लाख बार देखा जा चुका था। इसे वायरल हॉग नाम के यूट्यूब पेज के जरिये साझा किया गया है। यूजर्स के कमेंट्स भी इस पर भर-भरकर आए। वीडियो का टाइटल है Man VS Monkey, हालांकि आदमी बनाम बंदर थ्योरी पर आधारित हॉलीवुड में फिल्में तो बनती रहती हैं लेकिन हकीकत में ऐसा सुनने में कम ही आता है।

यूट्यूब के इस वीडियो में हो सकता है कि आपको स्पेशल वीएफएक्स, साउंड और दूसरे तकनीकि पहलू इस अवधारणा की फिल्मों से कमतर लगे लेकिन गौर से देखेंगे तो आदमी और बंदर की इस लड़ाई में छिपे बेहद ही गंभीर पहलू समझ पाएंगे। दरअसल, वक्त के साथ-साथ एक जिस तरह से आदमी आधुनिक सभ्यता और विकास में आगे बढ़ा है, उसके साथ-साथ बहुतायत में उसके हिंसक होने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है। बुद्धिजीवियों का एक धड़ा मानता है कि अगर बंदर आपकी छत पर मंडराता है तो इसमें उसका दोष नहीं है, दोष आपका है जो उससे उसके जंगल और उनमें लगने वाले फल छीन लिए और उनकी जगह खुद के लिए कंकरीट के जंगल बना लिए।

बंदरों में इंसान की तरह विवेक भले काम न करता हो लेकिन कुदरत ने उन्हें इतनी समझ तो दी है कि इंसानों के सामान के बदले मैंगो ड्रिंक, रोटी और केले का जुगाड़ हो जाता है। उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में बंदरों ने जीवन चलाने के लिए इसी युक्ति को आत्मसात कर न जाने कितने लोगों को रोजगार तक दे दिया है। इस वीडियो को देखने और स्टोरी को पढ़ने वाले यह ध्यान रखें कि जब भी कभी ऐसी स्थिति आए तो बंदर से उलझना नहीं है, बुद्धि का इस्तेमाल करना है।

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