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सरेराह पड़ी नवजात पर किसी का नहीं गया ध्यान, तब कुत्तों ने बचाई जान

घटना पश्चिम बंगाल के कोलकाता की है। यहां हावड़ा स्टेशन के पास कोई नवजात बच्ची छोड़ गया था। वह तकरीबन छह माह की थी। डायपर में बच्ची रो रही थी। पास में...

कुत्ते सबसे वफादार पशु होते हैं। और इंसान के अच्छे दोस्त भी। हाल ही में यह बात फिर से सच साबित हुई। पश्चिम बंगाल में कुछ कुत्तों ने वह काम किया, जो इंसान नहीं कर सका। यहां कोई बीच सड़क पर नवजात बच्ची को छोड़ गया था। कुत्तों की नजर पड़ी, तो वे उसकी सुरक्षा में घंटों डटे रहे। इस दौरान आम लोग भी वहां से गुजरे, लेकिन किसी की नजर बच्ची पर नहीं गई।

घटना पश्चिम बंगाल के कोलकाता की है। यहां हावड़ा स्टेशन के पास कोई नवजात बच्ची छोड़ गया था। वह तकरीबन छह माह की थी। डायपर में बच्ची रो रही थी। पास में घूम रहे कुत्तों की उस पर नजर पड़ी, तो वे चौकन्ने हुए। मदद की चाह में कई घंटे उसकी सुरक्षा में खड़े रहे। कुत्तों ने इस दौरान बच्ची के पास सुरक्षा घेरा भी बना लिया था।

भीड़-भाड़ वाले इलाके से इस दौरान सैकड़ों लोग गुजरे, लेकिन सबने उस बच्ची को अनदेखा कर दिया। अगर किसी की नजर पड़ी भी तो उसने बच्ची को सहारा देने या उठाने की जहमत भी न उठाई। तब वे आवारा कुत्ते ही उसके लिए जीवनदाता बने।

अचानक आरपीएफ जवान की नजर वहां गई। उसने सोचा कि कुत्ते क्यों जमा हैं। उसने रेलवे कर्मियों को इस बारे में बताया। सूचना पर कर्मियों ने पास जाकर देखा, तो आश्चर्य हुआ। कुत्ते वहीं डटे थे। वे उस नवजात की रक्षा कर रहे थे। इसके बाद बच्ची को अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद वहां से उसे चाइल्ड लाइन के हवाले किया गया।

कुत्तों ने इससे साबित किया कि वे बेहद समझदार और वफादार होते हैं। उनमें सूंघने और समझने की गजब की क्षमता होती है। वैसे यह ऐसा पहला मामला नहीं है, जब आवारा कुत्तों ने इस तरह अपनी अक्लमंदी दिखाई हो। साल 1996 में कुछ ऐसा ही हुआ था। तब भी मामला पश्चिम बंगाल के पुरुलिया का था, जिसमें चार कुत्तों ने एक नवजात को बचाया था।

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