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बच्चों को टॉयलेट पेपर ले जाना पड़ा है साथ, क्लास के बाहर उतारने होते हैं जूते; हैरान कर देंगे यहां स्कूल से जुड़े 10 कायदे

पढ़ाई के साथ थोड़ी मौज-मस्ती व मनोरंजन भी जरूरी है। मसलन प्रॉम या पार्टी वगैरह। लेकिन यहां स्कूल इस मामले में काफी पीछे हैं। वे पार्टी करने में यकीन नहीं रखते हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

हर स्कूल-कॉलेज के अपने नियम कायदे होते हैं। ये क्लास से लेकर किताबों से जुड़े होते हैं। मगर दक्षिण कोरिया के स्कूलों में बड़े ही अनोखे नियम-कानून लागू होते हैं। मसलन यहां पर स्टूडेंट्स को घर से ही टॉयलेट पेपर लाना पड़ता है, जबकि क्लास के भीतर उन्हें जूते पहनने की अनुमति नहीं होती। आइए जानते हैं, यहां के स्कूलों के कुछ ऐसे ही अनोखे नियम कानूनों को-

अधिकतर देशों में शनिवार को स्कूल बंद होते हैं। पर यहां क्लास लगती हैं। छात्रों व अभिभावकों ने इसे लेकर बवाल काटा, जिसके बाद सरकार को इस नियम में संशोधन करना पड़ा। अब महीने में सिर्फ दो शनिवार को ही क्लास लगती है।

यहां स्कूलों में ड्रेस कोड को लेकर काफी सख्ती है। अतिरिक्त मेकअप या गहने पहनना की अनुमति भी नहीं है। स्कूल में बीच-बीच में इस चीज को लेकर चेकिंग भी होती है। अंगूठी, चेन या फिर हल्का सा लिप बाम लगाने पर भी स्टूडेंट्स के लिए समस्या खड़ी हो जाती है।

द.कोरिया के स्कूलों में बाथरूम में टॉयलेट पेपर नहीं होता। छात्र-छात्राओं को खुद घर से लेकर इसे जाना पड़ता है।

भारत में मान्यता है कि जूते घर के भीतर नहीं रखे जाते। यहां यह नियम स्कूलों में लागू होता है। क्लास में जाने से पहले स्टूडेंट्स जूते-चप्पल बाहर रखते हैं, फिर अंदर जाते हैं।

स्कूल में साफ-सफाई का काम भी छात्रों के भरोसे होता है। कारण- यहां चपरासी या सफाई वाले नहीं होते। बच्चों को ही क्लास का कचरा बाहर फेंकना पड़ता है।

आमतौर पर स्कूलों की दोपहर तक छुट्टी हो जाती है। लेकिन यहां दोपहर के बाद कुछ स्पेशल या अतिरिक्त क्लासें होती हैं। कभी-कभी ये रात नौ बजे तक भी चलती हैं। स्टूडेंट्स को इनके अलावा भी ढेर सारी क्लासें और ट्यूशन लेने पड़ते हैं।

पढ़ाई के साथ थोड़ी मौज-मस्ती व मनोरंजन भी जरूरी है। मसलन प्रॉम या पार्टी वगैरह। लेकिन द.कोरियाई स्कूल इस मामले में काफी पीछे हैं। वे पार्टी करने में यकीन नहीं रखते हैं।

छात्र-छात्राएं क्लास में टीचर से सवाल नहीं पूछते। वे क्लास खत्म होने के बाद टीचर से बाहर उस बारे में पूछते हैं। अगर क्लास के भीतर वे सवाल पूछते हैं तो माना जाता है कि बच्चे शिक्षक के कौशल को चुनौती दे रहे हैं। वहीं, जो सोते पाया जाता है, वह क्लास में रुचि न लेने वाला समझा जाता है।

कोरिया में कहावत है- टीचर, भगवान बराबर होते हैं। शिक्षकों के लिए रिटायरमेंट की उम्र भी 65 साल नहीं है।

जो बच्चे अधिक शैतानी करते हैं या माहौल को बिगड़ाते हैं, उनके लिए स्कूल के नियमों में सजा का भी प्रावधान है। ऐसे बच्चों से निपटने के लिए टीचर उनकी पिटाई करते हैं, जबकि कई देशों में ऐसा करने पर प्रतिबंध है।

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